उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil si chiz ke gahak honge do ya ek hazar ke bich

दिल सी चीज़ के गाहक होंगे दो या एक हज़ार के बीच

دل سی چیز کے گاہک ہوں گے دو یا ایک ہزار کے بیچ

शायर: Ibn-e-Insha5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल सी चीज़ के गाहक होंगे दो या एक हज़ार के बीच
'इंशा' जी क्या माल लिए बैठे हो तुम बाज़ार के बीच

पीना-पिलाना 'ऐन गुनह है जी का लगाना 'ऐन हवस
आप की बातें सब सच्ची हैं लेकिन भरी बहार के बीच

ऐ सख़ियो ऐ ख़ुश-नज़रो यक गूना करम ख़ैरात करो
नारा-ज़नाँ कुछ लोग फिरें हैं सुब्ह से शहर-ए-निगार के बीच

ख़ार-ओ-ख़स-ओ-ख़ाशाक तो जानें एक तुझी को ख़बर न मिले
ऐ गुल-ए-ख़ूबी हम तो 'अबस बदनाम हुए गुलज़ार के बीच

मिन्नत-ए-क़ासिद कौन उठाए शिकवा-ए-दरबाँ कौन करे
नामा-ए-शौक़ ग़ज़ल की सूरत छपने को दो अख़बार के बीच