उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil ko ab tujhse juda ho kar bhi jina aa gaya

दिल को अब तुझ से जुदा हो कर भी जीना आ गया

دل کو اب تجھ سے جدا ہو کر بھی جینا آ گیا

शायर: Tahzeeb Hafi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल को अब तुझ से जुदा हो कर भी जीना आ गया
इस झरोके में हवा का ताज़ा झोंका आ गया

इन अँधेरों में पहुँच पाना बहुत दुश्वार था
मैं तिरी आवाज़ पर पलकें झपकता आ गया

एहतिरामन उँगलियों से होंट गीले कर लिए
जब मिरी दहलीज़ पे ख़ुद बह के दरिया आ गया

इस जहाँ में मेरे जैसा कोई बद-क़िस्मत भी है
जिस ने जो कुछ भी उतारा मुझ को पूरा आ गया

वो तो कहता था कि तुम से अच्छे सौ मिल जाएँगे
आज उसे इस हाल में देखा तो रोना आ गया

मारने वाला था अपने आप को उस रोज़ मैं
फिर मिरी आँखों के आगे उस का चेहरा आ गया