उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dekh usko KHwab mein jab aankh khul jati hai subh

देख उस को ख़्वाब में जब आँख खुल जाती है सुब्ह

دیکھ اس کو خواب میں جب آنکھ کھل جاتی ہے صبح

शायर: Taban Abdul Hai5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

देख उस को ख़्वाब में जब आँख खुल जाती है सुब्ह
क्या कहूँ मैं क्या क़यामत मुझ पे तब लाती है सुब्ह

शम्अ जब मज्लिस से महरुओं की लेती है उठा
क्या कहूँ क्या क्या सुनें उस वक़्त दिखलाती है सुब्ह

जिस का गोरा रंग हो वो रात को खिलता है ख़ूब
रौशनाई शम्अ की फीकी नज़र आती है सुब्ह

पास तू सोता है चंचल पर गले लगता नहीं
मिन्नतें करते ही सारी रात हो जाती है सुब्ह

नींद से उठता है 'ताबाँ' जब मिरा ख़ुर्शीद-रू
देख उस के मुँह के तईं शरमा के छुप जाती है सुब्ह