उर्दू शायरी · ग़ज़ल

chashm-e-maigun zara idhar kar de

चश्म-ए-मयगूँ ज़रा इधर कर दे

چشم میگوں ذرا ادھر کر دے

शायर: Faiz Ahmad Faiz6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

चश्म-ए-मयगूँ ज़रा इधर कर दे
दस्त-ए-क़ुदरत को बे-असर कर दे

तेज़ है आज दर्द-ए-दिल साक़ी
तल्ख़ी-ए-मय को तेज़-तर कर दे

जोश-ए-वहशत है तिश्ना-काम अभी
चाक-ए-दामन को ता जिगर कर दे

मेरी क़िस्मत से खेलने वाले
मुझ को क़िस्मत से बे-ख़बर कर दे

लुट रही है मिरी मता-ए-नियाज़
काश वो इस तरफ़ नज़र कर दे

'फ़ैज़' तकमील-ए-आरज़ू मालूम
हो सके तो यूँही बसर कर दे