उर्दू शायरी · ग़ज़ल

chale the ghar se to hum dard ki dawa ke liye

चले थे घर से तो हम दर्द की दवा के लिए

چلے تھے گھر سے تو ہم درد کی دوا کے لئے

शायर: Ejaz Ahmad Ejaz6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

चले थे घर से तो हम दर्द की दवा के लिए
पड़े हैं रस्ते में तेरे मगर दुआ के लिए

मबादा शब की सियाही ज़मीं को खा जाए
नक़ाब रुख़ से उठा दो ज़रा ख़ुदा के लिए

कोई चराग़ तो आँधी से बच के निकलेगा
जला दिए हैं बहुत से दिए हवा के लिए

यहाँ तो रोज़ नई आफ़तों से पाला है
'हुसैन' कितने अब आएँगे कर्बला के लिए

वो जिस ने तूर पे मूसा को बे-क़रार किया
तड़प रही है नज़र फिर उसी अदा के लिए

ज़मीं का सीना तो शोलों की मिस्ल जलता रहा
तरस के चल दिए 'एजाज़' इक घटा के लिए