उर्दू शायरी · ग़ज़ल

be-dam hue bimar dawa kyon nahin dete

बे-दम हुए बीमार दवा क्यों नहीं देते

بے دم ہوئے بیمار دوا کیوں نہیں دیتے

शायर: Faiz Ahmad Faiz6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बे-दम हुए बीमार दवा क्यों नहीं देते
तुम अच्छे मसीहा हो शिफ़ा क्यों नहीं देते

दर्द-ए-शब-ए-हिज्राँ की जज़ा क्यों नहीं देते
ख़ून-ए-दिल-ए-वहशी का सिला क्यों नहीं देते

मिट जाएगी मख़्लूक़ तो इंसाफ़ करोगे
मुंसिफ़ हो तो अब हश्र उठा क्यों नहीं देते

हाँ नुक्ता-वरो लाओ लब-ओ-दिल की गवाही
हाँ नग़्मागरो साज़-ए-सदा क्यों नहीं देते

पैमान-ए-जुनूँ हाथों को शरमाएगा कब तक
दिल वालो गरेबाँ का पता क्यों नहीं देते

बर्बादी-ए-दिल जब्र नहीं 'फ़ैज़' किसी का
वो दुश्मन-ए-जाँ है तो भुला क्यों नहीं देते