उर्दू शायरी · ग़ज़ल

baDe KHulus baDi sadgi se haar gae

बड़े ख़ुलूस बड़ी सादगी से हार गए

بڑے خلوص بڑی سادگی سے ہار گئے

शायर: Ejaz Ummeedi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बड़े ख़ुलूस बड़ी सादगी से हार गए
तुम्हारे हुस्न की जादूगरी से हार गए

शिकस्त-ए-फ़ाश ज़माने को दे भी सकते थे
ग़रीब लोग मगर मुफ़लिसी से हार गए

समझ में आ गईं जब 'अज़्मतें तिरे ग़म की
तो यूँ हुआ कि मुसलसल ख़ुशी से हार गए

जिन्हें 'अज़ीज़ थी पाबंदी-ए-ख़ुलूस बहुत
वो दुश्मनी से नहीं दोस्ती से हार गए

दर-ए-हबीब का पाबंद 'इश्क़ हो न सका
दिल-ओ-नज़र की हम आवारगी से हार गए

तख़य्युलात में यकसानियत कहाँ 'ए'जाज़'
कभी ख़ुदी से कभी बे-ख़ुदी से हार गए