उर्दू शायरी · ग़ज़ल

baat bas se nikal chali hai

बात बस से निकल चली है

بات بس سے نکل چلی ہے

शायर: Faiz Ahmad Faiz6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बात बस से निकल चली है
दिल की हालत सँभल चली है

अब जुनूँ हद से बढ़ चला है
अब तबीअ'त बहल चली है

अश्क ख़ूनाब हो चले हैं
ग़म की रंगत बदल चली है

या यूँही बुझ रही हैं शमएँ
या शब-ए-हिज्र टल चली है

लाख पैग़ाम हो गए हैं
जब सबा एक पल चली है

जाओ अब सो रहो सितारो
दर्द की रात ढल चली है