उर्दू शायरी · ग़ज़ल

apne hathon se saja aur mujhe sandal kar de

अपने हाथों से सजा और मुझे संदल कर दे

اپنے ہاتھوں سے سجا اور مجھے صندل کر دے

शायर: Saba Azeez7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अपने हाथों से सजा और मुझे संदल कर दे
दिल की बस्ती में अजब प्यार की हलचल कर दे

तेरी यादों का ये शो'ला भी अजब है जानाँ
दिल के शादाब गुलिस्ताँ को भी जंगल कर दे

जज़्बा-ए-इश्क़ अगर दिल में है इस तरह से मिल
कि उड़ा होश मिरे और मुझे पागल कर दे

आ जा और आ के खिला अपनी मोहब्बत के गुलाब
मैं अधूरी हूँ अभी मुझ को मुकम्मल कर दे

हम-सफ़र तू है अगर मेरा तो ये ध्यान भी रख
वादी-ए-इश्क़ की हर राह को जल-थल कर दे

बेवफ़ाई की सज़ा तुझ को दे मौला ऐसी
मुझ को बा-होश रखे और तुझे पागल कर दे

हर मुसीबत से 'सबा' हँस के गुज़र जाऊँगी
मेरे सर पे वो अगर प्यार का बादल कर दे