उर्दू शायरी · ग़ज़ल

agarche aah-e-sar-e-sham bhi zaruri hai

अगरचे आह-ए-सर-ए-शाम भी ज़रूरी है

اگرچہ آہ سر شام بھی ضروری ہے

शायर: Jafar Baluch6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अगरचे आह-ए-सर-ए-शाम भी ज़रूरी है
दिल-ए-सितम-ज़दा आराम भी ज़रूरी है

सितम-शिआ'र की तफ़रीह-ए-सामेआ' के लिए
ख़रोश-ए-मुर्ग़-ए-तह-ए-दाम भी ज़रूरी है

ज़िया-ए-किरमक-ए-शब-ताब ही नहीं काफ़ी
सितारा-ए-सहर-अंजाम भी ज़रूरी है

गिराँ-बहा है मबाहिस की शबनम-आगीनी
अगरचे बुर्रिश-ए-समसाम भी ज़रूरी है

बड़ी है बात तो मुँह भी बड़ा मुहय्या कर
फिर इस के साथ बड़ा नाम भी ज़रूरी है

सुकूत गुल का अगर ना-गुज़ीर है 'जाफ़र'
तो अंदलीब का कोहराम भी ज़रूरी है