उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ab ye aalam hai ki jis shai pe nazar jati hai

अब ये आलम है कि जिस शय पे नज़र जाती है

اب یہ عالم ہے کہ جس شے پہ نظر جاتی ہے

शायर: Raees Niyazi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अब ये आलम है कि जिस शय पे नज़र जाती है
हू-ब-हू आप की तस्वीर नज़र आती है

ख़ुद को तारीख़ किसी वक़्त जो दोहराती है
मेरे हालात पे दुनिया को हँसा जाती है

याद-ए-अय्याम-ए-बहाराँ भी नहीं वज्ह-ए-सुकूँ
अब तो तज़ईन-ए-क़फ़स ही मुझे बहलाती है

बर्क़ बन बन के गिरी है मिरे दिल पर अक्सर
वो तजल्ली जो सर-ए-तूर नज़र आती है

आज कुछ उन की तवज्जोह में कमी पाता हूँ
ज़िंदगी मौत से दो-चार हुई जाती है

दिल भर आता है मिरा देख के नम आँख कोई
अपने रोने पे तो अब मुझ को हँसी आती है

मैं वो इक नंग-ए-ज़माना हूँ अज़ल ही से 'रईस'
ज़िंदगी है कि मिरे नाम से शरमाती है