उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aatish-e-gham se wo ruKHsar damakte dekhe

आतिश-ए-ग़म से वो रुख़्सार दमकते देखे

آتش غم سے وہ رخسار دمکتے دیکھے

शायर: Kaleem Usmani9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आतिश-ए-ग़म से वो रुख़्सार दमकते देखे
हम ने गुलज़ार ख़िज़ाँ में भी महकते देखे

शिकवा-ए-तीरा-शबी भूल गए अहल-ए-वफ़ा
उन की पलकों पे सितारे जो चमकते देखे

रात भीगी तो सुलगने लगा दामान-ए-ख़याल
सैकड़ों नश्तर-ए-ग़म दिल में खटकते देखे

कितने चेहरों पे जमी देखी है एहसास की गर्द
कितने सीनों में अलाव से दहकते देखे

लाख सय्याद ने नग़्मों पे बिठाए पहरे
ख़ुश-नवायान-ए-चमन फिर भी चहकते देखे

हम ये समझे कि सफ़ीरान-ए-चमन आए हैं
ख़ुश्क पत्ते जो कहीं दूर खड़कते देखे

प्यार से थाम लिए तुंद बगूलों ने क़दम
दश्त में जब तिरे दीवाने भटकते देखे

दोस्त बन कर जो किसी ने हमें मायूस किया
कितने पर्दे निगह-ओ-दिल से सरकते देखे

जाने क्या बात थी उन मस्त निगाहों में 'कलीम'
हम ने ईमान हज़ारों के बहकते देखे