उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aaj phir rang pe hai sham KHuda KHair kare

आज फिर रंग पे है शाम ख़ुदा ख़ैर करे

آج پھر رنگ پہ ہے شام خدا خیر کرے

शायर: Bal Swaroop Rahi9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आज फिर रंग पे है शाम ख़ुदा ख़ैर करे
फिर मिरे हाथ में है जाम ख़ुदा ख़ैर करे

लोग कहते हैं कि वो मुझ पे मेहरबान हैं फिर
उन के होंटों पे मिरा नाम ख़ुदा ख़ैर करे

है ये अफ़्वाह बड़े ज़ोर पे हर महफ़िल में
उन को मुझ से है कोई काम ख़ुदा ख़ैर करे

फिर रँगे-हाथ मुझे दर्द ने आ पकड़ा है
फिर मोहब्बत का है इल्ज़ाम ख़ुदा ख़ैर करे

लाखों तूफ़ान कि जिस दिल में बसे रहते थे
आज-कल है वहाँ आराम ख़ुदा ख़ैर करे

जो मुझे देख के नज़रों को चुरा लेते थे
उन की आँखों में है पैग़ाम ख़ुदा ख़ैर करे

जाने क्या सोच के उस बुत ने उलट दी है नक़ाब
और फिर वो भी सर-ए-बाम ख़ुदा ख़ैर करे

यूँ तो पहले भी कई दोस्त दग़ा देते थे
अब तो ये बात हुई 'आम ख़ुदा ख़ैर करे

मेरे मा'सूम इरादों ने दुबारा 'राही'
उन का आँचल है लिया थाम ख़ुदा ख़ैर करे