हम नहीं लड़ने वाले, न ही झगड़ने वाले
जो हवालों से साबित है बात वो ही करते हैंहक़ बात पे जीते हैं, हक़ बात पे मरते हैं
तुम जो कहते हो के मीलाद मनाना है ग़लतलाओ फिर अपने हवालों से ही क़ाइल कर दोकल इसी बात को ले कर के कहा था हमनेजश्न-ए-आक़ा न मनाओ ! ये कहाँ लिखा है
तुम जो कहते हो के, मिलाद कहाँ लिखा है ?आओ हम तुम को बताएं, ये यहाँ लिखा है !
जश्न-ए-मीलाद है हक़ पर, ये यहाँ लिखा हैदेखो क़ुरआन उठा कर, ये यहाँ लिखा है
उन की आमद पे लगाऊंगा मैं झंडे लेकिनक्या किसी और ने भी झंडे लगाए इसी दिन !आमिना कहती है, जन्नत से वो झंडे ले करआए जिब्रील ज़मीं पर, ये यहाँ लिखा है
जश्न-ए-मीलाद है हक़ पर, ये यहाँ लिखा हैदेखो क़ुरआन उठा कर, ये यहाँ लिखा है
वो मुझे कहता है महफ़िल न सजाई जाएऐसी कुछ बात बताओ के वो ख़ुद भी आएआओ महफ़िल में के आते हैं फ़रिश्ते इस मेंदेखो फ़रमान-ए-पयम्बर, ये यहाँ लिखा है
जश्न-ए-मीलाद है हक़ पर, ये यहाँ लिखा हैदेखो क़ुरआन उठा कर, ये यहाँ लिखा है
किस लिए करते हैं हम ज़िक्र-ए-रसूल-ए-अकरम !क्या कोई इस का हवाला भी है मेरे हमदम !ख़ूब चर्चा करो नेअ'मत जो मिली है तुम कोदेखो इरशाद-ए-मोअख़्ख़र, ये यहाँ लिखा है
जश्न-ए-मीलाद है हक़ पर, ये यहाँ लिखा हैदेखो क़ुरआन उठा कर, ये यहाँ लिखा है
अक़्ल के अंधे को दो कोई जवाब ऐसारब के महबूब को वो कहता है ख़ुद के जैसाअपने जैसा तू बताता है नबी को, सुन लेउन सानी है न हम-सर, ये यहाँ लिखा है
जश्न-ए-मीलाद है हक़ पर, ये यहाँ लिखा हैदेखो क़ुरआन उठा कर, ये यहाँ लिखा है
जो सवाल हम ने ए जावेद ! किए थे उन सेदे दिए उन के जुनैद ! हम ने हवाले सारेउन को समझा दिया कह कर, ये यहाँ लिखा है
जश्न-ए-मीलाद है हक़ पर, ये यहाँ लिखा हैदेखो क़ुरआन उठा कर, ये यहाँ लिखा है
बात पूछी थी यही साल-ए-गुज़िश्ता हम नेक्या कोई आए जवाब और हवाले उन के ?वो तो ला पाए न अब तक भी हवाले बेख़ुद !तू ही कह दे उन्हें जा कर, ये यहाँ लिखा है
जश्न-ए-मीलाद है हक़ पर, ये यहाँ लिखा हैदेखो क़ुरआन उठा कर, ये यहाँ लिखा है
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