नात लिरिक्स

Man Ki Muraaden Paaenge Khwaja Ke Darbaar Mein

मन की मुरादें पाएँगे ख़्वाजा के दरबार में

नात ख़्वान: सिदरतुल-मुंतहाशायर: वसीम बेख़ुद माण्डलवीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मन की मुरादें पाएँगे ख़्वाजा के दरबार मेंबिगड़ी को बनवाएँगे ख़्वाजा के दरबार में

गीत ख़ुशी के गाएँगे ख़्वाजा के दरबार मेंझूम झूम के जाएँगे ख़्वाजा के दरबार में

लाखों करोड़ों जाते हैं, मन की मुरादें पाते हैंहम भी कभी तो जाएँगे ख़्वाजा के दरबार में

ख़्वाजा की बारात में रहमत की बरसात हैनूर के बादल छाएँगे ख़्वाजा के दरबार में

मुज़्तर हैं, ग़म वाले हैं, दुनिया के ठुकराए हैंदर्द सुनाने जाएँगे ख़्वाजा के दरबार में

उन की चौखट चूम कर, अजमेर नगर में घूम करदिल के गुल खिल जाएँगे ख़्वाजा के दरबार में

'उर्स में उन के चारों ओर नूर के बादल बरसेंगेनूरी हम कहलाएँगे ख़्वाजा के दरबार में

दिल की मुरादें पाने को, दीन की राहें पाने कोबारी बारी जाएँगे ख़्वाजा के दरबार में

हम हैं, बेख़ुद अत्तारी ! उन के ग़ुलामों में शामिलमिल कर मिदहत गाएँगे ख़्वाजा के दरबार में

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