नात लिरिक्स

Un Ka Mangta Hun Jo Mangta Nahin Hone Dete

उन का मँगता हूँ जो मँगता नहीं होने देते

नात ख़्वान: हाफ़िज़ ताहिर क़ादरीशायर: तन्वीरुल्लाह शाकिरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

उन का मँगता हूँ, जो मँगता नहीं होने देतेये हवाले मुझे रुस्वा नहीं होने देते

उन का मँगता हूँ, जो मँगता नहीं होने देते

मेरे हर 'ऐब की करते हैं वो पर्दा-पोशीमेरे जुर्मों का तमाशा नहीं होने देते

उन का मँगता हूँ, जो मँगता नहीं होने देते

अपने मँगतों की वो फ़ेहरिस्त में रखते हैं सदामुझ को मोहताज किसी का नहीं होने देते

उन का मँगता हूँ, जो मँगता नहीं होने देते

है ये ईमान कि आएँगे लहद में मेरीअपने मँगतों को वो तन्हा नहीं होने देते

उन का मँगता हूँ, जो मँगता नहीं होने देते

ना'त पढ़ता हूँ तो आती है महक तयबा कीमेरे लहजे को वो मैला नहीं होने देते

उन का मँगता हूँ, जो मँगता नहीं होने देते

आप की याद से रहती है नमी आँखों मेंमेरे दरियाओं को सहरा नहीं होने देते

उन का मँगता हूँ, जो मँगता नहीं होने देते

हुक्म करते हैं तो मिलते हैं ये मक़्ते, शाकिर !आप न चाहें तो मतला' नहीं होने देते

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