तुम से मेरा आसरा है, या मेरे ग़ौसुल-वरा !जान-ओ-दिल तुम पर फ़िदा है, या मेरे ग़ौसुल-वरा !
हज़रत-ए-मौला-अली का वास्ता जब दे दियाजो भी कुछ माँगा, मिला है, या मेरे ग़ौसुल-वरा !
झोलियाँ ख़ाली रहेंगी किस तरह से जब शहा !सब को बे-माँगे दिया है, या मेरे ग़ौसुल-वरा !
औलिया की गर्दनों पर अल्लाह अल्लाह ! बे-गुमाँनक़्श-ए-पा भी आप का है, या मेरे ग़ौसुल-वरा !
ख़ुश्बू तब से आ रही बेख़ुद ! क़लम से रात-दिनइस क़लम से जब लिखा है, या मेरे ग़ौसुल-वरा !
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