नात लिरिक्स

Talab Ka Munh To Kis Qabil Hai Ya Ghaus

त़लब का मुँह तो किस क़ाबिल है या ग़ौस

शायर: इमाम अहमद रज़ा खानउपलब्ध: हिंदी

त़लब का मुँह तो किस क़ाबिल है या ग़ौसमगर तेरा करम कामिल है या ग़ौस

दुहाई या मुह़िय्युद्दीं दुहाईबला इस्लाम पर नाज़िल है या ग़ौस

वोह संगीं बिद्अ़तें वोह तेज़िये कुफ़्रकि सर पर तैग़ दिल पर सिल है या ग़ौस

अ़ज़ूमन क़ातिलन इ़न्दल-क़ितालिमदद को आ दमे बिस्मिल है या ग़ौस

ख़ुदारा नाख़ुदा आ दे सहाराहवा बिगड़ी भंवर ह़ाइल है या ग़ौस

जिला दे दीं, जला दे कुफ़्रो-इल्ह़ादकि तू मुह़्यी है तू क़ातिल है या ग़ौस

तेरा वक़्त और पड़े यूं दीन पर वक़्तन तू अ़ाजिज़ न तू ग़ाफ़िल है या ग़ौस

रही हां शामते आ’माल येह भीजो तू चाहे अभी ज़ाइल है या ग़ौस

ग़यूरा ! अपनी ग़ैरत का तसद्दुक़वोही कर जो तेरे क़ाबिल है या ग़ौस

ख़ुदारा मर्हमे ख़ाके क़दम देजिगर ज़ख़्मी है दिल घाइल है या ग़ौस

न देखूं शक्ले मुश्किल तेरे आगेकोई मुश्किल सी येह मुश्किल है या ग़ौस

वोह घेरा रिश्त-ए-शिर्के-ख़फ़ी नेफंसा ज़ुन्नार में येह दिल है या ग़ौस

किये तरसा व गब्र अक़्त़ाबो अब्दालयेह मह़्ज़ इस्लाम का साइल है या ग़ौस

तू क़ुव्वत दे मैं तन्हा काम बिस्यारबदन कमज़ोर दिल काहिल है या ग़ौस

अ़दू बद दीन मज़हब वाले ह़ासिदतू ही तन्हा का ज़ोरे दिल है या ग़ौस

ह़सद से इन के सीने पाक कर देकि बदतर दिक़ से भी येह सिल है या ग़ौस

ग़िज़ाए दिक़ येही ख़ूं उस्तुख़ां गोश्तयेह आतिश दीन की आकिल है या ग़ौस

दिया मुझ को उन्हें मह़रूम छोड़ामेरा क्या जुर्म ह़क़ फ़ासिल है या ग़ौस

ख़ुदा से लें लड़ाई वोह है मुअ़्त़ीनबी क़ासिम है तू मूसिल है या ग़ौस

अ़त़ाएं मुक़्तदिर ग़फ़्फ़ार की हैंअ़बस बन्दों के दिल में ग़िल है या ग़ौस

तेरे बाबा का फिर तेरा करम हैयेह मुंह वरना किसी क़ाबिल है या ग़ौस

भरन वाले तेरा झाला तो झालातेरा छींटा मेरा ग़ासिल है या ग़ौस

सना मक़्सूद है अ़र्ज़े ग़रज़ क्याग़रज़ का आप तू काफ़िल है या ग़ौस

रज़ा का ख़ातिमा बिलख़ैर होगातेरी रह़मत अगर शामिल है या ग़ौस

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