नात लिरिक्स

Ham Khaak Hain Aur Khaak Hi Maawa Hai Hamara

हम ख़ाक हैं और ख़ाक ही मावा है हमारा

शायर: इमाम अहमद रज़ा खानउपलब्ध: हिंदी

हम ख़ाक हैं और ख़ाक ही मावा है हमाराख़ाकी तो वोह आदम जदे आ’ला है हमारा

अल्लाह हमें ख़ाक करे अपनी त़लब मेंयेह ख़ाक तो सरकार से तमग़ा है हमारा

जिस ख़ाक पे रखते थे क़दम सय्यिदे अ़ालमउस ख़ाक पे क़ुरबां दिले शैदा है हमारा

ख़म हो गई पुश्ते फ़लक इस त़ा’ने ज़मीं सेसुन हम पे मदीना है वोह रुत्बा है हमारा

उस ने ल-क़बे ख़ाक शहन्शाह से पायाजो ह़ैदरे कर्रार कि मौला है हमारा

ऐ मुद्दइ़यो ! ख़ाक को तुम ख़ाक न समझेइस ख़ाक में मदफ़ूं शहे बत़्ह़ा है हमारा

है ख़ाक से ता’मीर मज़ारे शहे कौनैनमा’मूर इसी ख़ाक से क़िब्ला है हमारा

हम ख़ाक उड़ाएंगे जो वोह ख़ाक न पाईआबाद रज़ा जिस पे मदीना है हमारा

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