नात लिरिक्स

Silsila Ab To Hajj Ka Bana De | Ya Khuda Mujh Ko Kaba Dikha De

सिलसिला अब तो हज का बना दे | या ख़ुदा मुझ को काबा दिखा दे

नात ख़्वान: हाफ़िज़ ताहिर क़ादरीशायर: आसिम-उल-क़ादरी मुरादाबादीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

लब्बैक अल्लाहुम्म लब्बैकलब्बैक अल्लाहुम्म लब्बैक

सिलसिला अब तो हज का बना देया ख़ुदा ! मुझ को का'बा दिखा देआब-ए-ज़मज़म मुझे भी पिला देया ख़ुदा ! मुझ को का'बा दिखा दे

रब्बना या रब्बना ! रब्बना या रब्बना !रब्बना या रब्बना ! रब्बना या रब्बना !रब्बना !

तेरे दर पर, ख़ुदाया ! मैं आऊँहाल-ए-दिल अपना आ कर सुनाऊँऐसी तौफ़ीक़ मुझ को, ख़ुदा ! देया ख़ुदा ! मुझ को का'बा दिखा दे

सिलसिला अब तो हज का बना देया ख़ुदा ! मुझ को का'बा दिखा दे

रब्बना या रब्बना ! रब्बना या रब्बना !रब्बना या रब्बना ! रब्बना या रब्बना !रब्बना !

तेरा घर सामने जिस घड़ी होमेरे दिल की दु'आ आख़िरी होमुझ को ईमान पर ख़ातिमा देया ख़ुदा ! मुझ को का'बा दिखा दे

सिलसिला अब तो हज का बना देया ख़ुदा ! मुझ को का'बा दिखा दे

रब्बना या रब्बना ! रब्बना या रब्बना !रब्बना या रब्बना ! रब्बना या रब्बना !रब्बना !

हज्र-ए-अस्वद को, मौला ! मैं चूमूँऔर तवाफ़-ए-हरम में मैं झूमूँनग़्मे लब्बैक के भी सुना देया ख़ुदा ! मुझ को का'बा दिखा दे

आब-ए-ज़मज़म मुझे भी पिला देया ख़ुदा ! मुझ को का'बा दिखा दे

रब्बना या रब्बना ! रब्बना या रब्बना !रब्बना या रब्बना ! रब्बना या रब्बना !रब्बना !

हर आँख चाहती है का'बा दिखा दे, मौला !हसरत पुकारती है का'बा दिखा दे, मौला !

याद-ए-हरम में आँसू बहने को रो रहे हैंइक आग सी लगी है, का'बा दिखा दे, मौला !

हालात का हूँ मारा, दामन मेरा है ख़ालीअस्बाब की कमी है, का'बा दिखा दे, मौला !

ये मुल्तज़म से जा कर लिपटा रहे उजागरये आरज़ू बड़ी है का'बा दिखा दे, मौला !

वास्ता मुस्तफ़ा-मुर्तज़ा काप्यारे हसनैन और फ़ातिमा कामेरे दिल की सियाही मिटा देया ख़ुदा ! मुझ को का'बा दिखा दे

सिलसिला अब तो हज का बना देया ख़ुदा ! मुझ को का'बा दिखा दे

रब्बना या रब्बना ! रब्बना या रब्बना !रब्बना या रब्बना ! रब्बना या रब्बना !रब्बना !

सब्ज़ गुंबद की झाली पकड़ करमौत आ जाए, मौला ! वहीं परक़ब्र तयबा में मेरी बना देया ख़ुदा ! मुझ को का'बा दिखा दे

सिलसिला अब तो हज का बना देया ख़ुदा ! मुझ को का'बा दिखा दे

रब्बना या रब्बना ! रब्बना या रब्बना !रब्बना या रब्बना ! रब्बना या रब्बना !रब्बना !

तेरा 'आसिम हरम में खड़ा होसर 'अक़ीदत से इस का झुका होयूँ हरम के नज़ारे करा देया ख़ुदा ! मुझ को का'बा दिखा दे

सिलसिला अब तो हज का बना देया ख़ुदा ! मुझ को का'बा दिखा दे

रब्बना या रब्बना ! रब्बना या रब्बना !रब्बना या रब्बना ! रब्बना या रब्बना !रब्बना !

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