नात लिरिक्स

Sare Nabiyon Ke Ohde Bade Hain Lekin Aaqa Ka Mansab Juda Hai

सारे नबियों के ओहदे बड़े हैं लेकिन आक़ा का मनसब जुदा है

नात ख़्वान: सय्यिद हस्सानुल्लाह हुसैनीशायर: प्रोफ़ेसर सय्यिद इक़बाल अज़ीमउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

सारे नबियों के 'ओहदे बड़े हैं, लेकिन आक़ा का मनसब जुदा हैवो इमाम-ए-सफ़-ए-अंबिया हैं, उन का रुत्बा बड़ों से बड़ा है

कोई लफ़्ज़ों में कैसे बता दे, उन के रुत्बे की हद है तो क्या हैहम ने अपने बड़ों से सुना है, सिर्फ़ अल्लाह उन से बड़ा है

नाम जन्नत का तुम ने सुना है, मैं ने उस का नज़ारा किया हैमैं यहाँ से तुम्हें क्या बता दूँ, उन की नगरी की गलियों में क्या है

कितना प्यारा है मौसम वहाँ का, कितनी पुर-कैफ़ सारी फ़ज़ा हैतुम मेरे साथ ख़ुद चल के देखो, गर्द-ए-तयबा भी ख़ाक-ए-शिफ़ा है

वो जो इक शहर-ए-नूर-उल-हुदा है, जल्वा-गाहों का इक सिलसिला हैजिस की हर सुब्ह शम्सुद्दुहा है, जिस की हर शाम बदरुददुजा है

मुस्तक़िल उन की चौखट 'अता हो, मेरे मा'बूद ! ये इल्तिजा हैकोई पूछे तो ये कह सकूँ मैं, बाब-ए-जिब्रील मेरा पता है

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