नात लिरिक्स

Sahara Chahiye Sarkar Zindagi Ke Liye | Tadap Raha Hoon Madine Ki Hazri Ke Liye

सहारा चाहिए सरकार ज़िंदगी के लिए | तड़प रहा हूँ मदीने की हाज़िरी के लिए

नात ख़्वान: हाफ़िज़ ताहिर क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मेरे आक़ा ! मदीने बुला लीजिएमेरे आक़ा ! मदीने बुला लीजिए

सहारा चाहिए, सरकार ! ज़िंदगी के लिएतड़प रहा हूँ मदीने की हाज़िरी के लिए

तयबा के जाने वाले ! जा कर बड़े अदब सेमेरा भी क़िस्सा-ए-ग़म कहना शह-ए-'अरब से

कहना कि, शाह-ए-'आलम ! इक रंज-ओ-ग़म का मारादोनों जहाँ में जिस का हैं आप ही सहारा

हालात-ए-पुर-अलम से इस दम गुज़र रहा हैऔर काँपते लबों से फ़रियाद कर रहा है

बार-ए-ग़ुनाह अपना है दोश पर उठाएकोई नहीं है ऐसा जो पूछने को आए

भूला हुआ मुसाफ़िर मंज़िल को ढूँडता हैतारीकियों में माह-ए-कामिल को ढूँडता है

सीने में है अँधेरा, दिल है सियाह-ख़ानाये है मेरी कहानी, सरकार को सुनाना

कहना मेरे नबी से, महरूम हूँ ख़ुशी सेसर पर इक अब्र-ए-ग़म है, अश्क़ों से आँख नम है

पामाल-ए-ज़िंदगी हूँ, सरकार ! उम्मती हूँउम्मत के रहनुमा हो, कुछ 'अर्ज़-ए-हाल सुन लो

फ़रियाद कर रहा हूँ, मैं दिल-फ़िगार कब सेमेरा भी क़िस्सा-ए-ग़म कहना शह-ए-'अरब से

हुज़ूर ! ऐसा कोई इंतिज़ाम हो जाएसलाम के लिए हाज़िर ग़ुलाम हो जाए

सहारा चाहिए, सरकार ! ज़िंदगी के लिएतड़प रहा हूँ मदीने की हाज़िरी के लिए

मेरा दिल तड़प रहा है, मेरा जल रहा है सीनाकि दवा वहीं मिलेगी, मुझे ले चलो मदीना

नहीं माल-ओ-ज़र तो क्या है, मैं ग़रीब हूँ यही ना !मेरे 'इश्क़ ! मुझ को ले चल तू ही जानिब-ए-मदीना

आक़ा ! न टूट जाए ये दिल का आबगीनाअब के बरस भी, मौला ! रह जाऊँ मैं कहीं ना

दिल रो रहा है जिन का, आँसू छलक रहे हैंउन 'आशिक़ों का सदक़ा, बुलवाइए मदीना

मेरे आक़ा ! मदीने बुला लीजिएमेरे आक़ा ! मदीने बुला लीजिए

मदीने जाऊँ, फिर आऊँ, दोबारा फिर जाऊँये ज़िंदगी मेरी यूँही तमाम हो जाए

सहारा चाहिए, सरकार ! ज़िंदगी के लिएतड़प रहा हूँ मदीने की हाज़िरी के लिए

ऐ 'आज़ीम-ए-मदीना ! जा कर नबी से कहनासोज़-ए-ग़म-ए-अलम से अब जल रहा है सीना

कहना के बढ़ रही है अब दिल की इज़्तिराबीक़दमों से दूर हूँ मैं, क़िस्मत की है ख़राबी

कहना के दिल में मेरे अरमाँ भरे हुए हैंकहना के हसरतों के नश्तर चुभे हुए हैं

है आरज़ू ये दिल की, मैं भी मदीने जाऊँसुल्तान-ए-दो-जहाँ को दाग़-ए-जिगर दिखाऊँ

काटूँ हज़ार चक्कर तयबा की हर गली केयूँही गुज़ार दूँ मैं अय्याम ज़िंदगी के

फूलों पे जाँ निसारूँ, काँटों पे दिल को वारूँज़र्रों को दूँ सलामी, दर की करूँ ग़ुलामी

दीवार-ओ-दर को चूमूँ, चौखट पे सर को रख दूँरौज़े को देख कर मैं रोता रहूँ बराबर

'आलम के दिल में है ये हसरत न जाने कब सेमेरा भी क़िस्सा-ए-ग़म कहना शह-ए-'अरब से

सहारा चाहिए, सरकार ! ज़िंदगी के लिएतड़प रहा हूँ मदीने की हाज़िरी के लिए

इक रोज़ होगा जाना सरकार की गली मेंहोगा वहीं ठिकाना सरकार की गली में

दिल में नबी की यादें, लब पर नबी की ना'तेंजाना तो ऐसे जाना सरकार की गली में

या मुस्तफ़ा ! ख़ुदा-रा दो इज़्न हाज़िरी काकर लूँ नज़ारा आ कर मैं आप की गली का

इक बार तो दिखा दो रमज़ान में मदीनाबेशक बना लो, आक़ा ! मेहमान दो घड़ी का

नसीब वालों में मेरा भी नाम हो जाएजो ज़िंदगी की मदीने में शाम हो जाए

सहारा चाहिए, सरकार ! ज़िंदगी के लिएतड़प रहा हूँ मदीने की हाज़िरी के लिए

बुला लो ना, बुला लो ना

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