नात लिरिक्स

Sahar Ki Faza Mein Jo Ik Raushani Hai | Wo Mere Nabi Ki Hi Jalwagari Hai

सहर की फ़ज़ा में जो इक रौशनी है | वो मेरे नबी की ही जल्वा-गरी है

नात ख़्वान: सय्यिद हस्सानुल्लाह हुसैनीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

वो मेरे नबी की ही जल्वा-गरी है

नबी की मोहब्बत है ईमाँ का मेहवरयही बंदगी है, यही ज़िंदगी है

मलक हों बशर हों, फ़लक हों ज़मीं होसभी पर, हुज़ूर ! आप की सरवरी है

तरस्ती है ख़ुश्बू भी छूने को दामनवो ख़ुश्बू जो ज़ुल्फ़-ए-नबी से चली है

है सज्जाद के लब पे नाम-ए-मुहम्मदयही नाम ईमान की ताज़गी है

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