नात लिरिक्स

Ramzan Ke Roze Aaye | Rab Ka Ehsan Hai Mah-e-Ramzan Hai

रमज़ान के रोज़े आए | रब का एहसान है माह-ए-रमज़ान है

नात ख़्वान: हाफ़िज़ ताहिर क़ादरीशायर: मुहम्मद आसिम-उल-क़ादरी मुरादाबादीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

रहमत ले कर, बरकत ले कर आया है रमज़ानआया है रमज़ान, आया है रमज़ान

रमज़ान के रोज़े आए, फिर रहमत बरकत लाएजो रब को राज़ी कर ले, वो बेशक जन्नत जाए

रब का एहसान है, माह-ए-रमज़ान हैलब पे मुस्कान है, माह-ए-रमज़ान हैफ़ज़्ल-ए-मौला से जन्नत के दर खुल गएवाह ! क्या शान है, माह-ए-रमज़ान है

रहमत-ए-रमज़ान ! रहमत-ए-रमज़ान !रहमत-ए-रमज़ान ! रहमत-ए-रमज़ान !

रब की रहमत उतरती है इस माह मेंरोज़ जन्नत सँवरती है इस माह मेंइस महीने में क़ुरआँ उतारा गयाफ़ज़्ल-ए-सुब्हान है, माह-ए-रमज़ान है

रमज़ान के रोज़े आए, फिर रहमत बरकत लाएजो रब को राज़ी कर ले, वो बेशक जन्नत जाए

मस्जिदें देखो सज्दों से आबाद हैंऔर तिलावत से क़ुरआँ की दिल शाद हैंज़िक्र-ए-मौला से तर हैं ज़बानें सदाताज़ा ईमान है, माह-ए-रमज़ान है

रमज़ान के रोज़े मैं रखूँगाहर रोज़ तरावीह मैं पढ़ूँगासहरी की रौनक़ मैं देखूँगाइफ़्तार का मंज़र मैं देखूँगा

है सदा-ए-अज़ाँ, लब पे सल्ले-'अलाकितना दिलकश ये मंज़र है इफ़्तार कालुत्फ़ सहरी का है, ने'मतें ख़ूब हैंशुक्र-ए-रहमान है, माह-ए-रमज़ान है

रहमत-ए-रमज़ान ! रहमत-ए-रमज़ान !रहमत-ए-रमज़ान ! रहमत-ए-रमज़ान !

माह-ए-रमज़ाँ में सदक़ा करो अपना मालबेबसों और ग़रीबों का रखो ख़यालये महीना मदद का है, कीजे मददरब का फ़रमान है, माह-ए-रमज़ान है

रमज़ान के रोज़े आए, फिर रहमत बरकत लाएजो रब को राज़ी कर ले, वो बेशक जन्नत जाए

रोज़ा-दारों के मुँह से जो बू आती हैमुश्क से बढ़ के मौला को वो भाती हैइस महीने के रोज़े जो रखता नहींवो तो नादान है, माह-ए-रमज़ान है

रब का एहसान है, माह-ए-रमज़ान हैलब पे मुस्कान है, माह-ए-रमज़ान है

रोज़ा-दारों को रब से शरफ़ वो मिलाकरती हैं मछलियाँ भी ख़ुदा से दु'आइस की 'अज़मत पे, ऐ 'आसिम-उल-क़ादरी !दिल ये क़ुर्बान है, माह-ए-रमज़ान है

रहमत-ए-रमज़ान ! रहमत-ए-रमज़ान !रहमत-ए-रमज़ान ! रहमत-ए-रमज़ान !

ने'मत का महीना आया है, बरकत का महीना आया है

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