नात लिरिक्स

Noor-o-Rahmat Ki Har Samt Barsat Hai | Aaj Meraj-e-Sarkar Ki Raat Hai | Meraj-e-Nabi Ho Mubarak

नूर-ओ-रहमत की हर सम्त बरसात है | आज मेराज-ए-सरकार की रात है | मेराज-ए-नबी हो मुबारक

नात ख़्वान: हाफ़िज़ ताहिर क़ादरीशायर: तफ़्सीर रज़ा अमजदीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मुबारक मुबारक मुबारक !मे'राज-ए-नबी हो मुबारक !

मे'राज-ए-मुस्तफ़ा ! मे'राज-ए-मुस्तफ़ा !

नूर-ओ-रहमत की हर सम्त बरसात हैआज मे'राज-ए-सरकार की रात हैकैसी लुत्फ़-ओ-करम की 'इनायात हैआज मे'राज-ए-सरकार की रात है

मुबारक मुबारक मुबारक !मे'राज-ए-नबी हो मुबारक !

अंबिया सफ़-ब-सफ़ दस्त-बस्ता खड़ेमुंतज़िर हैं सभी शाह-ए-कौनैन केआसमाँ पर फ़रिश्तों की बारात हैआज मे'राज-ए-सरकार की रात है

नूर-ओ-रहमत की हर सम्त बरसात हैआज मे'राज-ए-सरकार की रात है

मुबारक मुबारक मुबारक !मे'राज-ए-नबी हो मुबारक !

उन के ज़ेर-ए-क़दम चाँद हो ही गयानाज़ था अपनी रिफ़'अत पे जिस को बड़ाकितनी आ'ला मेरे शाह की ज़ात हैआज मे'राज-ए-सरकार की रात है

है 'अर्श-ए-बरीं पर जल्वा-फ़िगनमहबूब-ए-ख़ुदा सुब्हानल्लाह

हैरान हुए बर्क़ और नज़रइक आन है और बरसों का सफ़रराकिब ने कहा अल्लाहु-ग़नीमर्कब ने कहा सुब्हानल्लाह

है 'अब्द कहाँ, मा'बूद कहाँमे'राज की शब है राज़ निहाँवो नूर हिजाब-ए-नूर में थेख़ुद रब ने कहा सुब्हानल्लाह

तालिब का पता मतलूब को हैमतलूब है तालिब से वाक़िफ़पर्दे में बुला कर मिल भी लियापर्दा भी रहा सुब्हानल्लाह

माँग लो माँग लो तुम को जो चाहिएसब मिलेगा तुम्हें आज अल्लाह सेखुल गया बाब-ए-लुत्फ़-ओ-'इनायात हैआज मे'राज-ए-सरकार की रात है

मुबारक मुबारक मुबारक !मे'राज-ए-नबी हो मुबारक !

जश्न-ए-मे'राजुन्नबी मुबारक हो !जश्न-ए-मे'राजुन्नबी मुबारक हो !

निकले हैं रब से मिलने वो 'आली-मक़ामकर रहे आदम-ओ-'ईसा इन को सलामक़ुदसियों की ज़बाँ महव-ए-नग़मात हैआज मे'राज-ए-सरकार की रात है

नूर-ओ-रहमत की हर सम्त बरसात हैआज मे'राज-ए-सरकार की रात है

मुबारक मुबारक मुबारक !मे'राज-ए-नबी हो मुबारक !

क्या शान तुम्हारी है, आक़ा !तुम 'अर्श-ए-बरीं पर पहुँचे होज़ीशान नबी हैं सब लेकिनमे'राज का दूल्हा कोई नहीं

मे'राज के दूल्हा ! मरहबा !असरा के दूल्हा ! मरहबा !नबियों ने बोला ! मरहबा !मूसा ने बोला ! मरहबा !ईसा ने बोला ! मरहबा !मलाइक बोले ! मरहबा !और तारे बोले ! मरहबा !ये चाँद भी बोला ! मरहबा !

आज क्यूँ हर तरफ़ फैली है रौशनीज़ोर पर क्यूँ है ये चाँद की चाँदनीमैं बताता हूँ तुम को कि क्या बात हैआज मे'राज-ए-सरकार की रात है

नूर-ओ-रहमत की हर सम्त बरसात हैआज मे'राज-ए-सरकार की रात है

मुबारक मुबारक मुबारक !मे'राज-ए-नबी हो मुबारक !

बोले जिब्रील सिदरा पे सरकार सेआगे जाऊँ तो जल जाएँगे पर मेरेबस यहीं तक मेरा आप का साथ हैआज मे'राज-ए-सरकार की रात है

मुबारक मुबारक मुबारक !मे'राज-ए-नबी हो मुबारक !

आज रहमत के बादल हैं सर पर मेरेलुत्फ़-ओ-इकराम से मेरे दामन भरेलब पे, तफ़्सीर ! मेरे सजी ना'त हैआज मे'राज-ए-सरकार की रात है

नूर-ओ-रहमत की हर सम्त बरसात हैआज मे'राज-ए-सरकार की रात है

मुबारक मुबारक मुबारक !मे'राज-ए-नबी हो मुबारक !

एक पल में हज़ारों 'आलम मेंआना-जाना मेरे हुज़ूर का है

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