नात लिरिक्स

Noor Ka Aisa Sarapa Dhoondte Reh Jaoge

नूर का ऐसा सरापा ढूँडते रह जाओगे

नात ख़्वान: हाफ़िज़ ताहिर क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

नूर का ऐसा सरापा ढूँडते रह जाओगेसाया मेरे मुस्तफ़ा का ढूँडते रह जाओगे

ना'त की 'आदत हमें जन्नत तलक ले जाएगीतुम क़िताबों में हवाला ढूँडते रह जाओगे

शामियाना-ए-मुहम्मद हश्र में देगा पनाहमुन्किरो ! उस दिन भी साया ढूँडते रह जाओगे

सर कटाएँ, घर लुटाएँ अहल-ए-बैत-ए-मुस्तफ़ाहश्र तक ऐसा घराना ढूँडते रह जाओगे

जो भी गुस्ताख़ी करेगा 'आइशा की शान मेंइस तरह गाड़ेंगे ज़िंदा ढूँडते रह जाओगे

हज़रत-ए-शब्बीर ने सज्दा जो कर्बल में कियाहै ये दा'वा ऐसा सज्दा ढूँडते रह जाओगे

मत जलो ग़ौस-उल-वरा से वर्ना फिर रोज़-ए-जज़ामुँह छुपाने का ठिकाना ढूँडते रह जाओगे

लौटना तयबा से, कातिब ! 'आशिक़ों से पूछिएसब्ज़ गुंबद का नज़ारा ढूँडते रह जाओगे

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