नात लिरिक्स

Milta Hai Kya Namaz Mein Sajde Mein Ja Ke Dekh

मिलता है क्या नमाज़ में सज्दे में जा के देख

नात ख़्वान: हाफ़िज़ ताहिर क़ादरीशायर: हाफ़िज़ शौक़ फ़रीदीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मिलता है क्या नमाज़ में सज्दे में जा के देखअल्लाह के हुज़ूर तू सर को झुका के देख

मिलता है क्या नमाज़ में सज्दे में जा के देख

बेशक बुराइयों से बचाती नमाज़ हैबंदों को किब्रिया से मिलाती नमाज़ हैमुश्किल को, रंज-ओ-ग़म को मिटाती नमाज़ हैआए न गर यक़ीन तो फिर आज़मा के देख

मिलता है क्या नमाज़ में सज्दे में जा के देख

ख़ल्लाक़-ए-काएनात का फ़रमान है नमाज़मोमिन की आन-बान है, पहचान है नमाज़इक दीन का सुतून है और शान है नमाज़पढ़ कर नमाज़ अपने ख़ुदा को मना के देख

मिलता है क्या नमाज़ में सज्दे में जा के देख

करती नमाज़ सुर्ख़रू रब के हुज़ूर हैज़ाहिर का हुस्न और ये बातिन का नूर हैशैतानी वार को भी ये कर देती चूर हैदुनिया से हट, नमाज़ में दिल को लगा के देख

मिलता है क्या नमाज़ में सज्दे में जा के देख

रिश्वत से तेरे दिल में कराहत ये लाएगीग़ाफ़िल ! नमाज़ सूद से तुझ को बचाएगीआदाब ज़िंदगी के तुझे ये सिखाएगीइक बार ख़ुद को राह-ए-ख़ुदा में तू ला के देख

मिलता है क्या नमाज़ में सज्दे में जा के देख

शौक़-ए-फ़रीदी ! रब की रिज़ा है नमाज़ मेंआती नज़र नबी की अदा है नमाज़ मेंइब्न-ए-'अली का सर भी कटा है नमाज़ मेंकितने बुलंद हैं ये तक़ाज़े वफ़ा के देख

मिलता है क्या नमाज़ में सज्दे में जा के देखअल्लाह के हुज़ूर तू सर को झुका के देख

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