नात लिरिक्स

Maskan-e-Mustafa Madina Hai | Kya Bataun Ki Kya Madina Hai With Tazmeen

मस्कन-ए-मुस्तफ़ा मदीना है | क्या बताऊँ कि क्या मदीना है तज़मीन के साथ

नात ख़्वान: सय्यिद हस्सानुल्लाह हुसैनीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मस्कन-ए-मुस्तफ़ा मदीना हैरहमतों से भरा मदीना है'अक़्ल से मा-वरा मदीना हैक्या बताऊँ कि क्या मदीना हैबस मेरा मुद्द'आ मदीना है

पी के जाम-ए-वफ़ा क़रीने सेआह निकली है मेरे सीने सेक्यूँ मुझे रोकते हो जीने सेउठ के जाऊँ कहाँ मदीने सेक्या कोई दूसरा मदीना है

उस के क़दमों की धूर तो देखोउस का कैफ़-ओ-सुरूर तो देखोदेखने का श'ऊर तो देखोउस की आँखों का नूर तो देखोजिस का देखा हुवा मदीना है

सामने हों तो गीत गाते हैंपीठ पीछे बुराई करते हैंबे-वफ़ाई का खेल रचते हैंदुनिया वाले तो दर्द देते हैंज़ख़्मी दिल की दवा मदीना है

ग़ैर के दर पे क्यूँ झुकाएँ जबींकोई हाजत नहीं कि जाएँ कहींहो ख़ज़ाना हो या कि ख़ुल्द-ए-बरींदिल में अब कोई आरज़ू ही नहींया मुहम्मद है या मदीना है

मेरे, तफ़्सीर ! हैं वही दिलबरमुझ से कमतर को कर दिया बर-तरक्या 'अजब इस में है ? कहूँ मैं अगरदिल फ़िदा है मदीने वाले परदिल, मुनव्वर ! मेरा मदीना है

कलाम:-

तज़मीन:तफ़्सीर रज़ा अमजदी

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