नात लिरिक्स

Main Dil Ko Chhod Aaya Hun Madine Ke Bazaron Mein

मैं दिल को छोड़ आया हूँ मदीने के बाज़ारों में

नात ख़्वान: सय्यिद हस्सानुल्लाह हुसैनीशायर: एस. एम. सादिक़उपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मैं दिल को छोड़ आया हूँ मदीने के बाज़ारों मेंवहाँ गुल खिलते देखे हैं पतझड़ की बहारों में

मैं दिल को छोड़ आया हूँ मदीने के बाज़ारों मेंमैं दिल को छोड़ आया हूँ

मेरी निस्बत है लासानी, मेरी नय्या को ग़म कैसानहीं वो डूबने देता जो बैठा है किनारों में

मैं दिल को छोड़ आया हूँ मदीने के बाज़ारों मेंमैं दिल को छोड़ आया हूँ

ये कैसे लोग कहते हैं दीदार-ए-यार ना होगामैं ने महबूब देखा है, हाँ अश्कों की क़तारों में

मैं दिल को छोड़ आया हूँ मदीने के बाज़ारों मेंमैं दिल को छोड़ आया हूँ

मेरा जीना, मेरा मरना तो फिर तयबा में हो जाताज़रा गर्दिश न होती तो मुक़द्दर के सितारों में

मैं दिल को छोड़ आया हूँ मदीने के बाज़ारों मेंमैं दिल को छोड़ आया हूँ

मुक़द्दर जिस के यावर हैं, दिखा देते हैं वो जल्वावो, सादिक़ ! एक होता है, लाखों में हज़ारों में

मैं दिल को छोड़ आया हूँ मदीने के बाज़ारों मेंमैं दिल को छोड़ आया हूँ

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