नात लिरिक्स

Mah-e-Ramzan Aa Gaya Hai

माह-ए-रमज़ाँ आ गया है

नात ख़्वान: हाफ़िज़ ताहिर क़ादरीशायर: तफ़्सीर रज़ा अमजदीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

रमज़ान मुबारक हो, रमज़ान मुबारक हो

हर तरफ़ नूरी फ़ज़ा है, क़ल्ब-ए-मोमिन झूम उठा हैमाह-ए-रमज़ाँ आ गया है, माह-ए-रमज़ाँ आ गया हैहर मुसलमाँ कह रहा है, हर कोई नग़्मा-सरा हैमाह-ए-रमज़ाँ आ गया है, माह-ए-रमज़ाँ आ गया है

हर तरफ़ नूरी फ़ज़ा है, क़ल्ब-ए-मोमिन झूम उठा हैमाह-ए-रमज़ाँ आ गया है, माह-ए-रमज़ाँ आ गया है

आसमाँ पे चाँद चमका, आया बरकत का महीनाचार-सू फैला उजाला, छट गया सारा अँधेराबारिश-ए-फ़ज़्ल-ए-ख़ुदा है, रहमत-ए-ख़ैर-उल-वरा हैमाह-ए-रमज़ाँ आ गया है, माह-ए-रमज़ाँ आ गया है

हर तरफ़ नूरी फ़ज़ा है, क़ल्ब-ए-मोमिन झूम उठा हैमाह-ए-रमज़ाँ आ गया है, माह-ए-रमज़ाँ आ गया है

इस महीने की जो नेकी है वो और नेकी से बरतरहो गया अज्र-ए-नवाफ़िल भी फ़राइज़ के बराबरइस का हर लम्हा जुदा है, इस का हर दिन पुर-ज़िया हैमाह-ए-रमज़ाँ आ गया है, माह-ए-रमज़ाँ आ गया है

रमज़ान मुबारक हो, रमज़ान मुबारक हो

'अशरा-ए-रहमत के दिन हैं रब की रहमत लूटने के'अशरा-ए-बख़्शिश के दिन तो हैं मु'आफ़ी माँगने केलूट ले जो चाहता है, माँग ले जो माँगना हैमाह-ए-रमज़ाँ आ गया है, माह-ए-रमज़ाँ आ गया है

हर तरफ़ नूरी फ़ज़ा है, क़ल्ब-ए-मोमिन झूम उठा हैमाह-ए-रमज़ाँ आ गया है, माह-ए-रमज़ाँ आ गया है

मोमिनो के चेहरे पे है इक 'अजब छाया उजालाआज शैतान-ए-ल'ईं का देख लीजे मुँह है कालाचार-सू हक़ का दिया है, ज़ुल्म का सीना फटा हैमाह-ए-रमज़ाँ आ गया है, माह-ए-रमज़ाँ आ गया है

हर तरफ़ नूरी फ़ज़ा है, क़ल्ब-ए-मोमिन झूम उठा हैमाह-ए-रमज़ाँ आ गया है, माह-ए-रमज़ाँ आ गया है

सहरी-ओ-इफ़्तार की लज़्ज़त को फिर से हम ने पायाहो गया है मोमिनों की नेकियों में फिर इज़ाफ़ाये करम रब का बड़ा है, जो ये दिन हम को मिला हैमाह-ए-रमज़ाँ आ गया है, माह-ए-रमज़ाँ आ गया है

हर तरफ़ नूरी फ़ज़ा है, क़ल्ब-ए-मोमिन झूम उठा हैमाह-ए-रमज़ाँ आ गया है, माह-ए-रमज़ाँ आ गया है

आज, तफ़्सीर-ए-रज़ा ! रब्ब-उल-'उला से तुम भी माँगोआ गया वक़्त-ए-दु'आ है, नार से आज़ादी माँगोजोश पर रब की 'अता है, बाब-ए-रहमत खुल चुका हैमाह-ए-रमज़ाँ आ गया है, माह-ए-रमज़ाँ आ गया है

रमज़ान मुबारक हो, रमज़ान मुबारक हो

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