नात लिरिक्स

Madani Rang Mein Rang Jaao Mere Yaar

मदनी रंग में रंग जाओ मेरे यार

नात ख़्वान: हाफ़िज़ ताहिर क़ादरीशायर: अब्दुल कमाल क़ादरी अत्तारीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

'अत्तार मेरा पीर, 'अत्तार मेरा पीर'अत्तार मेरा पीर, 'अत्तार मेरा पीर

मुर्शिद है बे-मिसाल, लजपाल, बे-नज़ीर

मदनी रंग में रंग जाओ, मेरे यार !मदनी रंग में रंग जाओ, मेरे यार !

मदनी क़ाफ़िला, चैनल मदनी,हुलिया-ओ-सूरत मदनी,मर्कज़-ओ-मजलिस मदनी,हर सनीचर तज़्किरा वो भी मदनी,मुन्ना-ओ-मुन्नी मदनी,या'नी मदीने की है बहार

इसी माहौल के 'आलिम का लक़ब है मदनी,जामि'आ, मक्तब मदनी,दर्स-ओ-मदारिस मदनीऔर ये मेरे शैख़-ए-तरीक़त की 'अतादावत-ए-इस्लामी का है गुलशन-ए-गुलज़ार

मदनी रंग में रंग जाओ, मेरे यार !मदनी रंग में रंग जाओ, मेरे यार !

मदनी क़ाफ़िलों में करता है जो दिल से सफ़र,पाता है वो ख़ैर बशर की,ब-ख़ुदा ! हुस्न-ए-नज़रहोता अगर उस का जिगर,मिस्ल-ए-हजर,उन की नज़र सेबिला-शक बनता वो गुलज़ार

मदनी क़ाफ़िलों में बटता है यूँ फ़ज़्ल-ए-ख़ुदा,उल्फ़त-ए-महबूब-ए-ख़ुदा,फ़ैज़-ए-'अली शेर-ए-ख़ुदा,सारे सहाबा से वफ़ा,सारे बुज़ुर्गों की विला,या'नी सँवर जाता है किरदार

मदनी रंग में रंग जाओ, मेरे यार !मदनी रंग में रंग जाओ, मेरे यार !

जहाँ सिद्दीक़ की गुस्ताख़ी में,हैदर की मोहब्बत में,सहाबा से बग़ावत में,यज़ीदों की मोहब्बत में,'अली शेर से नफ़रत मेंभरे रिफ़्ज़-ओ-ख़वारिज का जगा फ़ितना-ए-बद-कार

कि सहाबा पे लिखा ऐसा रिसाला,कि पड़ा ग़ैरों की तनक़ीद पे ताला,मेरे 'अत्तार ने तो अहल-ए-सुनन को दिया ना'राकि हर असहाब-ए-नबीजन्नत-ए-आ'ला का है हक़दार

मदनी रंग में रंग जाओ, मेरे यार !मदनी रंग में रंग जाओ, मेरे यार !

मदनी रंग में रंग जाओबलोची हो, कि गुजराती,कि बंगाली, कि पंजाबी,कि मैमन हो, कि हिंदी हो,कि सिंधी हो,कि अहनाफ़-ओ-शवाफ़े'अ हो, हनाबिल या मालिकी

यहाँ रंगत न ही सूरत से सरोकार,जो है 'आशिक़-ए-सरकार,सहाबा का वफ़ादार,करे ग़ौस-ओ-रज़ा,ख़्वाजा-ओ-सब-औलिया से प्यार,हमें है वही दरकार

मदनी रंग में रंग जाओ, मेरे यार !मदनी रंग में रंग जाओ, मेरे यार !

बड़ा अबतर है मेरा हाल,कि पल्ले नहीं आ'माल-ओ-ख़ुश-अफ़आल,करो चश्म-ए-'अता,बहर-ए-रज़ा ! तुम करो बेहतरमेरा किरदार-ए-बद-अतवार,बने नेक ये अब्दुल कमाल

मेरी निस्बत हनफ़ी,क़ादरी, अत्तारी, रज़वी हूँ मैं,मुर्शिद की बदौलत मेरा ये नाम है,बनता मेरा हर काम हैऔर फ़िक्र नहींमुर्शिद-ए-कामिल है,कि मैं हूँ सग-ए-'अत्तार

मदनी रंग में रंग जाओ, मेरे यार !मदनी रंग में रंग जाओ, मेरे यार !

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