'अत्तार मेरा पीर, 'अत्तार मेरा पीर'अत्तार मेरा पीर, 'अत्तार मेरा पीर
मुर्शिद है बे-मिसाल, लजपाल, बे-नज़ीर
मदनी रंग में रंग जाओ, मेरे यार !मदनी रंग में रंग जाओ, मेरे यार !
मदनी क़ाफ़िला, चैनल मदनी,हुलिया-ओ-सूरत मदनी,मर्कज़-ओ-मजलिस मदनी,हर सनीचर तज़्किरा वो भी मदनी,मुन्ना-ओ-मुन्नी मदनी,या'नी मदीने की है बहार
इसी माहौल के 'आलिम का लक़ब है मदनी,जामि'आ, मक्तब मदनी,दर्स-ओ-मदारिस मदनीऔर ये मेरे शैख़-ए-तरीक़त की 'अतादावत-ए-इस्लामी का है गुलशन-ए-गुलज़ार
मदनी रंग में रंग जाओ, मेरे यार !मदनी रंग में रंग जाओ, मेरे यार !
मदनी क़ाफ़िलों में करता है जो दिल से सफ़र,पाता है वो ख़ैर बशर की,ब-ख़ुदा ! हुस्न-ए-नज़रहोता अगर उस का जिगर,मिस्ल-ए-हजर,उन की नज़र सेबिला-शक बनता वो गुलज़ार
मदनी क़ाफ़िलों में बटता है यूँ फ़ज़्ल-ए-ख़ुदा,उल्फ़त-ए-महबूब-ए-ख़ुदा,फ़ैज़-ए-'अली शेर-ए-ख़ुदा,सारे सहाबा से वफ़ा,सारे बुज़ुर्गों की विला,या'नी सँवर जाता है किरदार
मदनी रंग में रंग जाओ, मेरे यार !मदनी रंग में रंग जाओ, मेरे यार !
जहाँ सिद्दीक़ की गुस्ताख़ी में,हैदर की मोहब्बत में,सहाबा से बग़ावत में,यज़ीदों की मोहब्बत में,'अली शेर से नफ़रत मेंभरे रिफ़्ज़-ओ-ख़वारिज का जगा फ़ितना-ए-बद-कार
कि सहाबा पे लिखा ऐसा रिसाला,कि पड़ा ग़ैरों की तनक़ीद पे ताला,मेरे 'अत्तार ने तो अहल-ए-सुनन को दिया ना'राकि हर असहाब-ए-नबीजन्नत-ए-आ'ला का है हक़दार
मदनी रंग में रंग जाओ, मेरे यार !मदनी रंग में रंग जाओ, मेरे यार !
मदनी रंग में रंग जाओबलोची हो, कि गुजराती,कि बंगाली, कि पंजाबी,कि मैमन हो, कि हिंदी हो,कि सिंधी हो,कि अहनाफ़-ओ-शवाफ़े'अ हो, हनाबिल या मालिकी
यहाँ रंगत न ही सूरत से सरोकार,जो है 'आशिक़-ए-सरकार,सहाबा का वफ़ादार,करे ग़ौस-ओ-रज़ा,ख़्वाजा-ओ-सब-औलिया से प्यार,हमें है वही दरकार
मदनी रंग में रंग जाओ, मेरे यार !मदनी रंग में रंग जाओ, मेरे यार !
बड़ा अबतर है मेरा हाल,कि पल्ले नहीं आ'माल-ओ-ख़ुश-अफ़आल,करो चश्म-ए-'अता,बहर-ए-रज़ा ! तुम करो बेहतरमेरा किरदार-ए-बद-अतवार,बने नेक ये अब्दुल कमाल
मेरी निस्बत हनफ़ी,क़ादरी, अत्तारी, रज़वी हूँ मैं,मुर्शिद की बदौलत मेरा ये नाम है,बनता मेरा हर काम हैऔर फ़िक्र नहींमुर्शिद-ए-कामिल है,कि मैं हूँ सग-ए-'अत्तार
मदनी रंग में रंग जाओ, मेरे यार !मदनी रंग में रंग जाओ, मेरे यार !
'attar mera peer, 'attar mera peer'attar mera peer, 'attar mera peer
murshid hai be-misaallajpaal, be-nazeer
madani rang me.n rang jaao, mere yaar !madani rang me.n rang jaao, mere yaar !
madani qaafila, channel madani,huliya-o-soorat madani,markaz-o-majlis madani,har saneechar tazkira wo bhi madani,munna-o-munni madani,yaa'ni madine ki hai bahaar
isi maahaul ke 'aalim ka laqab hai madani,jaami'aa, maktab madani,dars-o-madaaris madaniaur ye mere shaiKH-e-tareeqat ki 'atadawat-e-islami ka hai gulshan-e-gulzaar
madani rang me.n rang jaao, mere yaar !madani rang me.n rang jaao, mere yaar !
madani qaafilon me.n karta hai jo dil se safar,paata hai wo KHair bashar ki,ba-KHuda ! husn-e-nazarhota agar us ka jigar,misl-e-hajar,un ki nazar sebila-shak banta wo gulzaar
madani qaafilon me.n
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