नात लिरिक्स

Laqab Siddiq Ban Jaye Sadaqat Ho To Aisi Ho

लक़ब सिद्दीक़ बन जाए सदाक़त हो तो ऐसी हो

नात ख़्वान: हाफ़िज़ ताहिर क़ादरीशायर: मौलाना जमीलुर्रहमान अजमल अब्बासीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

लक़ब सिद्दीक़ बन जाए, सदाक़त हो तो ऐसी होमज़ार-ओ-ग़ार के साथी, रफ़ाक़त हो तो ऐसी हो

मेरे सरकार का रौज़ा जो जन्नत से भी आ'ला हैतेरी बेटी का घर है वो, करामत हो तो ऐसी हो

उठाया अपने काँधों पर है सरदार-ए-दो-'आलम कोख़ुदा की इस अमानत की हिफ़ाज़त हो तो ऐसी हो

दिलबर-ओ-दिलदार हैं सिद्दीक़-ए-अकबरसहाबा के सरदार हैं सिद्दीक़-ए-अकबरऔर हैदर के यार हैं सिद्दीक़-ए-अकबरहर सुन्नी का प्यार हैं सिद्दीक़-ए-अकबर

तेरी पाकीज़ा बेटी पर ग़लत तोहमत लगी जिस दमख़ुदा ने ख़ुद सफ़ाई दी, बराअत हो तो ऐसी हो

ख़ुदा की राह में क़ुर्बान कर डाला है तन-मन-धनबदन पर टाट ओढ़ा है, सख़ावत हो तो ऐसी हो

शब-ए-हिजरत तेरे दर पर मेरे आक़ा ने दस्तक दीकिसी के सिदक़-ए-ईमाँ पर शहादत हो तो ऐसी हो

बता मंज़र, ऐ ग़ार-ए-सौर ! दीवाने की नज़रों काकि थे महबूब झोली में, ज़ियारत हो तो ऐसी हो

रसूलुल्लाह तेरे घर में दूल्हा बन के आए थेघराने हों तो ऐसे हों, क़राबत हो तो ऐसी हो

दिलबर-ओ-दिलदार हैं सिद्दीक़-ए-अकबरसहाबा के सरदार हैं सिद्दीक़-ए-अकबरऔर हैदर के यार हैं सिद्दीक़-ए-अकबरहर सुन्नी का प्यार हैं सिद्दीक़-ए-अकबर

नबी के बा'द सब असहाब ने क़ाइद तुम्हे माना'उमर बै'अत, 'अली बै'अत, ख़िलाफ़त हो तो ऐसा हो

'अब्बासी ! तू ग़ुलामी कर नबी के सब सहाबा कीइसी रह में कटे गर्दन, स'आदत हो तो ऐसी हो

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