नात लिरिक्स

Kursi Par Koi Bhi Baithe Raja To Mera Khwaja Hai

कुर्सी पर कोई भी बैठे राजा तो मेरा ख़्वाजा है

नात ख़्वान: हाफ़िज़ ताहिर क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

या ख़्वाजा ! या ख़्वाजा ! या ख़्वाजा ! या ख़्वाजा !ख़्वाजा ! या ख़्वाजा ! ख़्वाजा ! या ख़्वाजा !

मैं गदा-ए-ख़्वाजा-ए-चिस्त हूँ, मुझे इस गदाई पे नाज़ हैमेरा नाज़ ख़्वाजा पे क्यूँ न हो, मेरा ख़्वाजा बंदा-नवाज़ है

उस के करम के सब हैं भिकारी, क्या राजा महाराजा हैकुर्सी पर कोई भी बैठे, राजा तो मेरा ख़्वाजा है

सारे हिन्द का है राजा मेरा ख़्वाजा महाराजासारे हिन्द का है राजा मेरा ख़्वाजा महाराजा

हैदर का लाडला है, वो ज़हरा का लाल हैबेशक मेरा मु'ईन मुहम्मद की आल हैदीवानों को किस बात का आख़िर मलाल हैख़्वाजा को अपनी परजा का पूरा ख़याल है

मु'ईनुद्दीन...

कुर्सी पर कोई भी बैठे, राजा तो मेरा ख़्वाजा है

सारे हिन्द का है राजा मेरा ख़्वाजा महाराजा

हर आँख चाहती है ज़ियारत मु'ईन कीहर दिल में बस गई है मोहब्बत मु'ईन कीइस सर-ज़मीन-ए-हिन्द के शाहों ने कह दियामहशर तलक रहेगी हुकूमत मु'ईन की

मु'ईनुद्दीन...

कुर्सी पर कोई भी बैठे, राजा तो मेरा ख़्वाजा है

सारे हिन्द का है राजा मेरा ख़्वाजा महाराजा

हम ग़रीबों की सदाओं ने बुलाया है तुझेहिन्द का शाह मुहम्मद ने बनाया है तुझेकैसे आएगा कोई हर्फ़ हुकूमत पे तेरीपंज-तन पाक ने कुर्सी पे बिठाया है तुझे

मु'ईनुद्दीन...

कुर्सी पर कोई भी बैठे, राजा तो मेरा ख़्वाजा है

सारे हिन्द का है राजा मेरा ख़्वाजा महाराजा

प्यारा है हसनैन का, बेशक नबी की आल हैसंजर वाला पीर मेरा सय्यिदा का लाल हैमस्त है, मस्तान है, हर हाल में ख़ुश-हाल हैचिश्तिया-दामन को जो पकड़ा वो मालामाल है

मु'ईनुद्दीन...

कुर्सी पर कोई भी बैठे، राजा तो मेरा ख़्वाजा है

सारे हिन्द का है राजा मेरा ख़्वाजा महाराजा

तू दर-ब-दर की ठोकरें इक बार खा के देखमिलता है क्या किसी से, ज़रा आज़मा के देखतू जिन से मिल रहा है ये सारे ग़ुलाम हैंराजा को देखना है तो अजमेर जा के देख

मु'ईनुद्दीन...

कुर्सी पर कोई भी बैठे, राजा तो मेरा ख़्वाजा है

सारे हिन्द का है राजा मेरा ख़्वाजा महाराजा

दर-ए-ख़्वाजा पे सवाली को खड़ा रहने दोसर नदामत से झुका है तो झुका रहने दो

मुझ को मिल जाएगा सदक़ा, मैं चला जाऊँगाकासा-ए-दिल मेरा क़दमों में पड़ा रहने दो

ख़ुद ही फ़रमाएँगे मुजरिम पे वो रहमत की नज़रमुझ को ख़्वाजा की 'अदालत में पड़ा रहने दो

मु'ईनुद्दीन...

कुर्सी पर कोई भी बैठे, राजा तो मेरा ख़्वाजा है

सारे हिन्द का है राजा मेरा ख़्वाजा महाराजा

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