नात लिरिक्स

Khalifa-e-Awwal Muhammad Ka Naib Sahaba Ka Sardar Siddiq-e-Akbar

ख़लीफ़ा-ए-अव्वल मुहम्मद का नाइब सहाबा का सरदार सिद्दीक़-ए-अकबर

नात ख़्वान: हाफ़िज़ ताहिर क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

या अमीर-उल-मोमिनीन ! या अमीर-उल-मोमिनीन !या अमीर-उल-मोमिनीन ! या अमीर-उल-मोमिनीन !

हर दिल में बसा है सिद्दीक़हर जाँ में बसा है सिद्दीक़मेरी रूह पुकारे सिद्दीक़हर साँस पुकारे सिद्दीक़

ख़लीफ़ा-ए-अव्वल, मुहम्मद का नाइबसहाबा का सरदार सिद्दीक़-ए-अकबरसरापा मोहब्बत, सरापा सदाक़तसरापा-ए-ईसार सिद्दीक़-ए-अकबर

ख़लीफ़ा-ए-अव्वल, मुहम्मद का नाइबसहाबा का सरदार सिद्दीक़-ए-अकबर

सालार-ए-सहाबा अबू-बकरवो पहला ख़लीफ़ा अबू-बकरआक़ा का प्यारा अबू-बकरहम सब ने पुकारा अबू-बकर

सरकार का दरबार नहीं देख रहे क्या ?दरबार में दो यार नहीं देख रहे क्या ?

देख रहे क्या ? देख रहे क्या ?देख रहे क्या ? देख रहे क्या ?

सरकार का दरबार नहीं देख रहे क्या ?दरबार में दो यार नहीं देख रहे क्या ?

दुनिया के मे'यार को सब देख रहे होअल्लाह का मे'यार नहीं देख रहे क्या ?

देख रहे क्या ? नहीं देख रहे क्या ?देख रहे क्या ? नहीं देख रहे क्या ?

कहते हो क़ुरआँ में अबू-बक्र कहाँ है ?तुम आयत-ए-फ़िल-ग़ार नहीं देख रहे क्या ?

सिद्दीक़ की इमामत पे हैं और मुक़्तदियों मेंतुम हैदर-ए-कर्रार नहीं देख रहे क्या ?

देख रहे क्या ? नहीं देख रहे क्या ?देख रहे क्या ? नहीं देख रहे क्या ?

दूल्हा बने आए अबू-बक्र के घर मेंकौनैन के सरदार नहीं देख रहे क्या ?

देख रहे क्या ? नहीं देख रहे क्या ?देख रहे क्या ? नहीं देख रहे क्या ?

हर घर नहीं अल्लाह का घर होता, मेरे दोस्त !तुम मस्जिद-ए-ज़र्रार नहीं देख रहे क्या ?

देख रहे क्या ? देख रहे क्या ?

तहसीन ! अभी हक़ के तरफ़-दार बहुत हैंये मजमा'-ए-बेदार नहीं देख रहे क्या ?

देख रहे क्या ? नहीं देख रहे क्या ?देख रहे क्या ? नहीं देख रहे क्या ?

कहा सानी-इसनैन इन को ख़ुदा नेकहा इन को सिद्दीक़ है मुस्तफ़ा नेमुहम्मद है शाहकार रब्ब-ए-जली कामुहम्मद का शाहकार सिद्दीक़-ए-अकबर

ख़लीफ़ा-ए-अव्वल, मुहम्मद का नाइबसहाबा का सरदार सिद्दीक़-ए-अकबर

सदा नूर-ए-सिद्दीक़ बढ़ता रहेगासदा नाम-ए-सिद्दीक़ ऊँचा रहेगाहै क़ुरआन भी जिस के पढ़ता क़सीदेवो है माह-ए-अनवार सिद्दीक़-ए-अकबर

ख़लीफ़ा-ए-अव्वल, मुहम्मद का नाइबसहाबा का सरदार सिद्दीक़-ए-अकबर

हर दिल में बसा है सिद्दीक़हर जाँ में बसा है सिद्दीक़मेरी रूह पुकारे सिद्दीक़हर साँस पुकारे सिद्दीक़

अफ़ज़लुल-बशर बा'द-अज़-अंबियाअमीर-उल-मोमिनीन मौला सिद्दीक़

सारी ख़ल्क़त की रहमत समेटे हुएजिस जगह पर है सिद्दीक़ लेटे हुएउस मुहम्मद के हुजरे पे क़ुर्बान मेंरश्क-ए-फ़िरदौस-ए-जन्नत की क्या बात है

दो 'आलम की रहमत समेटे हुए हैंमुहम्मद के क़दमों में लेटे हुए हैंकोई इस से बढ़ कर नहीं और जन्नतहै जिस जा पे सरकार सिद्दीक़-ए-अकबर

ख़लीफ़ा-ए-अव्वल, मुहम्मद का नाइबसहाबा का सरदार सिद्दीक़-ए-अकबर

सदाक़त का ताज इन के सर पर सजायाइमाम इन को शाह-ए-जहाँ ने बनायाये ताहिर बताए तो क्यूँकर बताएमक़ामात-ओ-असरार सिद्दीक़-ए-अकबर

ख़लीफ़ा-ए-अव्वल, मुहम्मद का नाइबसहाबा का सरदार सिद्दीक़-ए-अकबर

हर दिल में बसा है सिद्दीक़हर जाँ में बसा है सिद्दीक़मेरी रूह पुकारे सिद्दीक़हर साँस पुकारे सिद्दीक़

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