नात लिरिक्स

Jis Dar Pe Ghulamon Ke Halaat Badalte Hain

जिस दर पे ग़ुलामों के हालात बदलते हैं

नात ख़्वान: सय्यिद हस्सानुल्लाह हुसैनीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

जिस दर पे ग़ुलामों के हालात बदलते हैंआओ उसी आक़ा के दरबार में चलते हैं

ये अपना 'अक़ीदा है, जाएँगे वो जन्नत मेंसरकार की सीरत के साँचे में जो ढलते हैं

जिस दर पे ग़ुलामों के हालात बदलते हैंआओ उसी आक़ा के दरबार में चलते हैं

लिल्लाह बुला लीजिए दुख-दर्द के मारों कोतयबा की ज़ियारत को अरमान मचलते हैं

जिस दर पे ग़ुलामों के हालात बदलते हैंआओ उसी आक़ा के दरबार में चलते हैं

होता है करम जिन पे सुल्तान-ए-मदीना कातूफ़ान की मौजों से बे-ख़ौफ़ निकलते हैं

जिस दर पे ग़ुलामों के हालात बदलते हैंआओ उसी आक़ा के दरबार में चलते हैं

तू अदना गदा बन जा सरकार की चौखट कासब शाह-ओ-गदा जिन की ख़ैरात पे पलते हैं

जिस दर पे ग़ुलामों के हालात बदलते हैंआओ उसी आक़ा के दरबार में चलते हैं

कहता हूँ, मु'ईन ! उस दम मैं ना'त-ए-शह-ए-वालाजज़्बात मेरे जिस दम अश'आर में ढलते हैं

जिस दर पे ग़ुलामों के हालात बदलते हैंआओ उसी आक़ा के दरबार में चलते हैं

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