नात लिरिक्स

Jagah Jee Lagaane Ki Duniya Nahin Hai

जगह जी लगाने की दुनिया नहीं है

नात ख़्वान: हाफ़िज़ ताहिर क़ादरीशायर: ख़्वाजा अज़ीज़ुल हसनउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

तू ख़ुशी के फूल लेगा कब तलक ?तू यहाँ ज़िंदा रहेगा कब तलक ?

एक दिन मरना है, आख़िर मौत हैकर ले जो करना है, आख़िर मौत है

जगह जी लगाने की दुनिया नहीं हैये 'इबरतकी जा है, तमाशा नहीं है

जहाँ में हैं 'इबरत के हर-सू नमूनेमगर तुझ को अँधा किया रंग-ओ-बू नेकभी ग़ौर से ये भी देखा है तू नेजो आबाद थे वो महल अब हैं सूने

जगह जी लगाने की दुनिया नहीं हैये 'इबरत की जा है, तमाशा नहीं है

मिले ख़ाक में अहल-ए-शाँ कैसे कैसे !मकीं हो गए ला-मकाँ कैसे कैसे !हुए नामवर बे-निशाँ कैसे कैसे !ज़मीं खा गई नौजवाँ कैसे कैसे !

यही तुझ को धुन है, रहूँ सब से बालाहो ज़ीनत निराली, हो फ़ैशन निरालाजिया करता है क्या यूँही मरने वाला ?तुझे हुस्न-ए-ज़ाहिर ने धोके में डाला

जगह जी लगाने की दुनिया नहीं हैये 'इबरत की जा है, तमाशा नहीं है

क़ब्र में मय्यत उतरनी है ज़रूरजैसी करनी वैसी भरनी है ज़रूर

दबदबा दुनिया में ही रह जाएगाहुस्न तेरा ख़ाक में मिल जाएगा

बे-नमाज़ी तेरी शामत आएगीक़ब्र की दीवार बस मिल जाएगी

तोड़ देगी क़ब्र तेरी पस्लियाँदोनों हाथों की मिलें जों उँगलियाँ

लंदन-ओ-पैरिस के सपने छोड़ देबस मदीने से ही रिश्ते जोड़ दे

बे-वफ़ा दुनिया पे मत कर ए'तिबारतू अचानक मौत का होगा शिकार

कर ले तौबा, रब की रहमत है बड़ीक़ब्र में वर्ना सज़ा होगी कड़ी

तुझे पहले बचपन ने बरसों खिलायाजवानी ने फिर तुझ को मजनूँ बनायाबुढ़ापे ने फिर आ के क्या क्या सतायाअजल तेरा कर देगी बिल्कुल सफ़ाया

अजल ने न छोड़ा, न किसरा, न दाराइसी से सिकंदर सा फ़ातेह भी हाराहर इक ले के क्या क्या न हसरत सिधारापड़ा रह गया सब यूँही ठाठ सारा

जगह जी लगाने की दुनिया नहीं हैये 'इबरत की जा है, तमाशा नहीं है

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