नात लिरिक्स

Jaate Hain Badi Shaan Se Meraj Ke Dulha

जाते हैं बड़ी शान से मेराज के दूल्हा

नात ख़्वान: हाफ़िज़ ताहिर क़ादरीशायर: हाफ़िज़ शौक़ फ़रीदीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मे'राज वाले दूल्हा ! मे'राज वाले दूल्हा !मे'राज वाले दूल्हा ! मे'राज वाले दूल्हा !

असरा में गुज़रे जिस दम बेड़े पे क़ुदसियों केहोने लगी सलामी, परचम झुका दिये हैं

जाते हैं बड़ी शान से मे'राज के दूल्हाअल्लाह ने महबूब को है पास बुलाया

जाते हैं बड़ी शान से मे'राज के दूल्हा

पैग़ाम लिए आए हैं जिब्रील ज़मीं परऐ सरवर-ए-कौनैन ! चलें 'अर्श-ए-बरीं परतालिब है ख़ुदा आज की शब आप का, सरवर !दीदार-ए-ख़ुदा कर लें, शहा ! क़ुर्ब में जा कर

अल्लाह ने महबूब को है पास बुलायाजाते हैं बड़ी शान से मे'राज के दूल्हा

जिब्रील-ए-अमीं कहने लगे चूम के तलवेबुर्राक़ है तय्यार खड़ी आइए चलिएबेताब हैं 'अर्शी इन्हें दिखलाइए जल्वेसब हूर-ओ-मलक दीद के मुश्ताक़ हैं कब से

अल्लाह ने महबूब को है पास बुलायाजाते हैं बड़ी शान से मे'राज के दूल्हा

मुश्ताक़ थी अक़्सा में रसूलों की जमा'अतसरकार ने की सारे रसूलों की इमामतअक़्सा से चले क़ुर्ब-ए-ख़ुदा के लिए हज़रतसब शान-ए-नबी देखते करते रहे हैरत

अल्लाह ने महबूब को है पास बुलायाजाते हैं बड़ी शान से मे'राज के दूल्हा

मर्तबा मेरे नबी का क्या 'अज़ीमुश्शान हैरब त'आला ने किया कैसा इन्हें ज़ीशान है

वाक़ि'आ मे'राज का है मो'जिज़ा सरकार कारब त'आला ने किया अपना उन्हें मेहमान है

हम उन से वफ़ादारी का इज़हार करेंगेमे'राज की शब महफ़िल-ए-सरकार करेंगेसरकार की सरकार में मे'राज के सदक़ेबख़्शिश के लिए 'अर्ज़ गुनहगार करेंगे

अल्लाह ने महबूब को है पास बुलायाजाते हैं बड़ी शान से मे'राज के दूल्हा

मे'राज की शब 'अर्श पे सरकार का जानादीदार-ए-ख़ुदा कर के भी फिर लौट के आनासरकार की ख़ातिर सभी कुछ ठहर सा जानाक्या शान-ए-रिसालत है कि शश्दर है ज़माना

दी सरवर-ए-'आलम को रसूलों ने सलामीकी शाह-ए-मदीना की फ़रिश्तों ने ग़ुलामीहर सम्त से आती है सदा सल्ले-'अला कीहै धूम मची 'अर्श पे मे'राज-ए-नबी की

अल्लाह ने महबूब को है पास बुलायाजाते हैं बड़ी शान से मे'राज के दूल्हा

बाड़ा जो बटा नूर का, आक़ा !  शब-ए-असराउस में से मिले शौक़-ए-फ़रीदी को भी हिस्सालिल्लाह 'अता कीजिए मे'राज का सदक़ाकासा लिए दहलीज़ पे हाज़िर है ये मँगता

अल्लाह ने महबूब को है पास बुलायाजाते हैं बड़ी शान से मे'राज के दूल्हा

सर-ए-ला-मकाँ से तलब हुईसू-ए-मुंतहा वो चले नबीकोई हद है उन के 'उरूज कीबलग़ल-'उला बि-कमालिही

वही ला-मकाँ के मकीं हुएसर-ए-'अर्श तख़्त-नशीं हुएये नबी हैं जिन के हैं ये मकाँवो ख़ुदा है जिस का मकाँ नहीं

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