नात लिरिक्स

Sultan Bareilly Ke | Har Sunni Ke Pyare Hain Sultan Bareilly Ke

सुल्तान बरेली के | हर सुन्नी के प्यारे हैं सुल्तान बरेली के

नात ख़्वान: Ghulam Mustafa Qadriशायर: वसीम बेख़ुद माण्डलवीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

रज़ा रज़ा ! मेरे रज़ा ! रज़ा रज़ा ! मेरे रज़ा !रज़ा रज़ा ! मेरे रज़ा ! रज़ा रज़ा ! मेरे रज़ा !

हर सुन्नी के प्यारे हैं सुल्तान बरेली केहर आँख के तारे हैं सुल्तान बरेली के

गुस्ताख़ ! ज़रा सुन ले, तुझ को ही मिटाने कोइक बर्क़ से धारे हैं सुल्तान बरेली के

सुन्नियों का पेशवा ! रज़ा रज़ा, रज़ा रज़ा !'आशिक़ों का रहनुमा ! रज़ा रज़ा, रज़ा रज़ा !ख़ाइफ़-ए-किब्रिया ! रज़ा रज़ा, रज़ा रज़ा !बा-कमाल-ओ-बा-हया ! रज़ा रज़ा, रज़ा रज़ा !

चालों में कभी भी न आ पाएँगे हम क्यूँ किसुन्नी के सहारे हैं सुल्तान बरेली के

हर सुन्नी के प्यारे हैं सुल्तान बरेली केहर आँख के तारे हैं सुल्तान बरेली के

पढ़ पढ़ के दुरूदों को, पढ़ पढ़ के सलामों कोहर लम्हा गुज़ारे हैं सुल्तान बरेली के

सुन्नियों का पेशवा ! रज़ा रज़ा, रज़ा रज़ा !'आशिक़ों का रहनुमा ! रज़ा रज़ा, रज़ा रज़ा !ख़ाइफ़-ए-किब्रिया ! रज़ा रज़ा, रज़ा रज़ा !बा-कमाल-ओ-बा-हया ! रज़ा रज़ा, रज़ा रज़ा !

अब तक न समझ आया, इन 'अक़्ल के अंधों कोरहमत के फवारे हैं सुल्तान बरेली के

हर सुन्नी के प्यारे हैं सुल्तान बरेली केहर आँख के तारे हैं सुल्तान बरेली के

यूँ ही लक़ब न आ'ला हज़रत हुआ है इन का'उल्मा के दुलारे हैं सुल्तान बरेली के

सुन्नियों का पेशवा ! रज़ा रज़ा, रज़ा रज़ा !'आशिक़ों का रहनुमा ! रज़ा रज़ा, रज़ा रज़ा !ख़ाइफ़-ए-किब्रिया ! रज़ा रज़ा, रज़ा रज़ा !बा-कमाल-ओ-बा-हया ! रज़ा रज़ा, रज़ा रज़ा !

बेख़ुद ने कहा सब से, किस किस के रज़ा ख़ाँ हैं?सब बोले हमारे हैं सुल्तान बरेली के

हर सुन्नी के प्यारे हैं सुल्तान बरेली केहर आँख के तारे हैं सुल्तान बरेली के

सुल्तान बरेली के, सुल्तान बरेली केसुल्तान बरेली के, सुल्तान बरेली के

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