नात लिरिक्स

Hamare Aaqa Hamare Maula Imam-e-Azam Abu Hanifa

हमारे आक़ा हमारे मौला इमाम-ए-आज़म अबू-हनीफ़ा

नात ख़्वान: हाफ़िज़ ताहिर क़ादरीशायर: मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

हमारे आक़ा, हमारे मौला, इमाम-ए-आ'ज़म अबू-हनीफ़ा !हमारे मावा, हमारे मलजा, इमाम-ए-आ'ज़म अबू-हनीफ़ा !

हमारे आक़ा, हमारे मौला, इमाम-ए-आ'ज़म अबू-हनीफ़ा !

ज़माने भर ने ज़माने भर में बहुत तजस्सुस किया है लेकिनमिला न कोई इमाम तुम सा, इमाम-ए-आ'ज़म अबू-हनीफ़ा !

हमारे आक़ा, हमारे मौला, इमाम-ए-आ'ज़म अबू-हनीफ़ा !

सिराज तू है, बग़ैर तेरे जो कोई समझा हदीस-ओ-क़ुरआँफिरे भटकता, न पाए रस्ता, इमाम-ए-आ'ज़म अबू-हनीफ़ा !

हमारे आक़ा, हमारे मौला, इमाम-ए-आ'ज़म अबू-हनीफ़ा !

तुम्हारे आगे तमाम 'आलम न क्यूँ करे ज़ानू-ए-अदब ख़मकि पेशवायान-ए-दीं ने माना, इमाम-ए-आ'ज़म अबू-हनीफ़ा !

न क्यूँ करें नाज़ अहल-ए-सुन्नत कि तुम से चमका नसीब-ए-उम्मतसिराज-ए-उम्मत मिला है तुम सा, इमाम-ए-आ'ज़म अबू-हनीफ़ा !

हमारे आक़ा, हमारे मौला, इमाम-ए-आ'ज़म अबू-हनीफ़ा !

हुआ ऊलुल-अम्र से ये साबित कि तेरी ता'अत ज़रूरी वाजिबख़ुदा ने तुम को किया हमारा, इमाम-ए-आ'ज़म अबू-हनीफ़ा !

जो तेरी तक़लीद शिर्क होती मुहद्दिसीं सारे होते मुशरिकबुख़ारी, मुस्लिम और इब्न-ए-माजा, इमाम-ए-आ'ज़म अबू-हनीफ़ा !

हमारे आक़ा, हमारे मौला, इमाम-ए-आ'ज़म अबू-हनीफ़ा !

कि जितने फ़ुक़हा मुहद्दिसीं हैं, तुम्हारे ख़िरमन से ख़ोशा-चीं हैंहों वासिते से कि बे-वसीला, इमाम-ए-आ'ज़म अबू-हनीफ़ा !

ख़बर ले, ऐ दस्तग़ीर-ए-उम्मत, है सालिक-ए-बे-ख़बर पे शिद्दतवो तेरा हो कर फिरे भटकता, इमाम-ए-आ'ज़म अबू-हनीफ़ा !

हमारे आक़ा, हमारे मौला, इमाम-ए-आ'ज़म अबू-हनीफ़ा !

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