नात लिरिक्स

Falak Par Chand Hai Nikla Rabi-ul-Awwal Mubarak Ho

फ़लक पर चाँद है निकला रबी-उल-अव्वल मुबारक हो

नात ख़्वान: सय्यिद हस्सानुल्लाह हुसैनीशायर: मुहम्मद नदीम ग़ाज़ीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

बारह रबी'-उल-अव्वल के दिन आई है ताज़ा बहारपढ़ते हैं सल्लल्लाहु व सल्लम आज दर-ओ-दीवार

फ़लक पर चाँद है निकला, रबी'-उल-अव्वल मुबारक होहै आया नूर अल्लाह का, रबी'-उल-अव्वल मुबारक हो

अँधेरों के जिगर को चीर कर सुबह नई आईजहाँ रौशन हुआ सारा, रबी'-उल-अव्वल मुबारक हो

फ़लक पर चाँद है निकला, रबी'-उल-अव्वल मुबारक होहै आया नूर अल्लाह का, रबी'-उल-अव्वल मुबारक हो

आक़ा की आमद ! मरहबा !दिलबर की आमद ! मरहबा !सोहणे की आमद ! मरहबा !मक्की की आमद ! मरहबा ! मरहबा !

न था है न कोई आएगा महबूब-ए-ख़ुदा जैसानबी ला-रैब है मेरा, रबी'-उल-अव्वल मुबारक हो

फ़लक पर चाँद है निकला, रबी'-उल-अव्वल मुबारक होहै आया नूर अल्लाह का, रबी'-उल-अव्वल मुबारक हो

हर इक बे-आसरे को मिल गया है आसरा उन कासहारा ग़म के मारों का, रबी'-उल-अव्वल मुबारक हो

फ़लक पर चाँद है निकला, रबी'-उल-अव्वल मुबारक होहै आया नूर अल्लाह का, रबी'-उल-अव्वल मुबारक हो

आक़ा की आमद ! मरहबा !दिलबर की आमद ! मरहबा !सोहणे की आमद ! मरहबा !मक्की की आमद ! मरहबा ! मरहबा !

ख़ुदा-ए-पाक के सारे रसूलों और नबियों सेजुदा है मर्तबा उन का, रबी'-उल-अव्वल मुबारक हो

फ़लक पर चाँद है निकला, रबी'-उल-अव्वल मुबारक होहै आया नूर अल्लाह का, रबी'-उल-अव्वल मुबारक हो

हसीं मंज़र है मिलादुन्नबी का हर तरफ़, हस्सान !हर इक लब पर है ये चर्चा, रबी'-उल-अव्वल मुबारक हो

फ़लक पर चाँद है निकला, रबी'-उल-अव्वल मुबारक होहै आया नूर अल्लाह का, रबी'-उल-अव्वल मुबारक हो

आक़ा की आमद ! मरहबा !दिलबर की आमद ! मरहबा !सोहणे की आमद ! मरहबा !मक्की की आमद ! मरहबा ! मरहबा !

सजी हैं मस्जिदें, ग़ाज़ी ! सजे बाज़ार और गलियाँसजा है घर हर 'आशिक़ का, रबी'-उल-अव्वल मुबारक हो

फ़लक पर चाँद है निकला, रबी'-उल-अव्वल मुबारक होहै आया नूर अल्लाह का, रबी'-उल-अव्वल मुबारक हो

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