उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zindagi nikhar aai jhel kar sitam tanha

ज़िंदगी निखर आई झेल कर सितम तन्हा

زندگی نکھر آئی جھیل کر ستم تنہا

शायर: Iffat Zeba Kakorvi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़िंदगी निखर आई झेल कर सितम तन्हा
तेरे दर से हाथ आया बस यही करम तन्हा

धड़कनें सुनाती हैं ला-मकाँ के अफ़्साने
कितनी दास्तानों को सुन रहे हैं हम तन्हा

मंज़िलें बुलाती हैं जुस्तुजू मचलती है
तीरगी का आलम है और हर क़दम तन्हा

ये भी छीन ले आ कर गर्दिश-ए-जहाँ मुझ से
चंद आरज़ूएँ हैं और मेरा दम तन्हा

काश कोई क़िस्मत से जा के इतना कह देता
हौसले मिरे रहबर तेरे पेच-ओ-ख़म तन्हा

रूह के उजालों ने तीरगी को ललकारा
ज़ुल्मतों की राहों में घिर गए हैं हम तन्हा