उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wo hans paDa junun ye machalne lagi hayat

वो हँस पड़ा जुनूँ ये मचलने लगी हयात

وہ ہنس پڑا جنوں یہ مچلنے لگی حیات

शायर: Iffat Zeba Kakorvi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वो हँस पड़ा जुनूँ ये मचलने लगी हयात
हाँ हाँ यही अदा यही अंदाज़-ए-इल्तिफ़ात

वो मुस्कुरा रहे हैं धुँदलकों की ओट से
यूँ आज़मा रही है मुझे तल्ख़ी-ए-हयात

आए हैं वो जुनूँ में पशेमानियाँ लिए
क्या क्या फ़रेब देता है हुस्न-ए-तसव्वुरात

बख़्शी है किस ने मेरे जुनूँ को ये आगही
समझा रहा है कौन मुझे रम्ज़-ए-काएनात

क्या कुछ नहीं मिला मुझे होश-ओ-ख़िरद से दूर
क़दमों में काएनात तो मुट्ठी में शश-जिहात

फूलों से अब न रब्त न काँटों से एहतियात
'ज़ेबा' बदल रहे हैं ब-तदरीज-ए-वाक़िआ'त