उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zard patta jo Dal se nikla

ज़र्द पत्ता जो डाल से निकला

زرد پتا جو ڈال سے نکلا

शायर: Jafar Sahni9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़र्द पत्ता जो डाल से निकला
हसरतों के वबाल से निकला

अपना वहम-ओ-गुमाँ क़वी कर के
वक़्त-ए-आख़िर ज़वाल से निकला

ज़िंदगी का तवील हंगामा
लाल सूरज के थाल से निकला

लोग चुप थे मगर वो अफ़्साना
वक़्त के क़ील-ओ-क़ाल से निकला

महव-ए-हैरत है आज तक मंज़िल
रास्ता कैसी चाल से निकला

वो ज़माँ और मकाँ से आगे था
मुतमइन हर ख़याल से निकला

कैसे तय हो बचा हुआ रस्ता
शेर बैठा है जाल से निकला

लो बग़ल में समेट कर रख लो
हाथ ठंडा है शाल से निकला

कैसा मुबहम जवाब ऐ 'जाफ़र'
मेरे वाज़ेह सवाल से निकला