उर्दू शायरी · ग़ज़ल

chandni shab bhar Tahalti chhat pe tanha rah gai

चाँदनी शब भर टहलती छत पे तन्हा रह गई

چاندنی شب بھر ٹہلتی چھت پہ تنہا رہ گئی

शायर: Jafar Sahni5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

चाँदनी शब भर टहलती छत पे तन्हा रह गई
प्यार की हर याद-ए-रंगीं बे-सहारा हो गई

जोश दरिया का बना था क़हर कश्ती के लिए
बेबसी में ना-तवाँ पतवार रुस्वा हो गई

दास्तान-ए-ज़िंदगी की जब किरन ख़ामोश थी
तब हवा भी सुन के चुप सारा फ़साना रह गई

फूल पत्ते जब चमन से दर-ब-दर होने लगे
पुर सकूँ सरसब्ज़ दुनिया बन के सहरा रह गई

हर गली में लुत्फ़ का दरिया रवाँ था 'साहनी'
मेरी ख़्वाहिश ऐसी रुत में फिर भी तन्हा रह गई