उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zamin se dur rahe aasman se dur rahe

ज़मीं से दूर रहे आसमाँ से दूर रहे

زمیں سے دور رہے آسماں سے دور رہے

शायर: Ehsas Muradabadi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़मीं से दूर रहे आसमाँ से दूर रहे
जो तुम थे पास तो सारे जहाँ से दूर रहे

जो अश्क-ए-ग़म मिज़ा-ए-ख़ूँ-फ़िशाँ से दूर रहे
फ़साना बन गए लफ़्ज़-ओ-बयाँ से दूर रहे

वो क्या बताएँ बहारों की हश्र-सामानी
जो ताइरान-ए-क़फ़स गुलसिताँ से दूर रहे

सितम-ज़रीफ़ी-ए-फ़ितरत वो मीर-ए-मंज़िल हैं
वही जो गर्द-ए-रह-ए-कारवाँ से दूर रहे

घटा सका न ज़माना दिलों की क़ुर्बत को
तुम्हारे पास रहे आस्ताँ से दूर रहे

वो दौर अस्ल में जान-ए-ग़ज़ल-सराई था
वो दौर जिस में कि हम आशियाँ से दूर रहे

नज़र से दूरी का 'एहसास' इतना ग़म तो न था
मलाल ये है दिल-ए-दोस्ताँ से दूर रहे