उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yun teri rah mein paDe hue hain

यूँ तिरी राह में पड़े हुए हैं

یوں تری راہ میں پڑے ہوئے ہیں

शायर: aabid umar10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यूँ तिरी राह में पड़े हुए हैं
जैसे दरगाह में पड़े हुए हैं

ग़म हैं जितने भी इस ज़माने के
मेरी इक आह में पड़े हुए हैं

मेरे बच्चों के ख़्वाब तो फ़िलहाल
छोटी तनख़्वाह में पड़े हुए हैं

बच के निकले जो मौत के मुँह से
याद-ए-अल्लाह में पड़े हुए हैं

कब किसी की हुई है ये दुनिया
हम अबस चाह में पड़े हुए हैं

ख़ाक होना नसीब है लेकिन
हशमत-ओ-जाह में पड़े हुए हैं

इक नज़र हम पे महविश-ए-आज़म
तेरे कुनजाह में पड़े हुए हैं

कुछ ग़रज़ ही नहीं जिसे हम से
उस की परवाह में पड़े हुए हैं

जिन को ज़िंदाँ में होना चाहिए था
हुजरा-ए-शाह में पड़े हुए हैं

आप से हम-कलाम है 'आबिद'
लोग क्यों वाह में पड़े हुए हैं