उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ho gaya jaise tera didar pahla aaKHiri

हो गया जैसे तिरा दीदार पहला आख़िरी

ہو گیا جیسے ترا دیدار پہلا آخری

शायर: aabid umar7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हो गया जैसे तिरा दीदार पहला आख़िरी
हो भी सकता है किसी का प्यार पहला आख़िरी

उम्र भर वो शख़्स अपनी बात पर क़ाएम रहा
और यूँ साबित हुआ इंकार पहला आख़िरी

जिस क़दर घायल किया ख़ुद सौ गुना घायल हुआ
इश्क़ ही तो था मिरा हथियार पहला आख़िरी

इस लिए मैं ने गुज़ारी ज़ीस्त हो कर मो'तदिल
समझा जाता है यहाँ मेआ'र पहला आख़िरी

जिन का दा'वा था कि हर तूफ़ान से टकराएँगे
उन को ही लगने लगा आज़ार पहला आख़िरी

हर तरफ़ ही पारसाओं का मिला जम्म-ए-ग़फ़ीर
पूरी बस्ती में था मैं बद-कार पहला आख़िरी

चोर था मुंसिफ़ के दिल में तुझ पे क़ाबिज़ हो गया
वर्ना 'आबिद' था तिरा हक़दार पहला आख़िरी