उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye qarz to mera hai chukaega koi aur

ये क़र्ज़ तो मेरा है चुकाएगा कोई और

یہ قرض تو میرا ہے چکائے گا کوئی اور

शायर: Aanis Moin8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये क़र्ज़ तो मेरा है चुकाएगा कोई और
दुख मुझ को है और नीर बहाएगा कोई और

क्या फिर यूँही दी जाएगी उजरत पे गवाही
क्या तेरी सज़ा अब के भी पाएगा कोई और

अंजाम को पहुँचूँगा मैं अंजाम से पहले
ख़ुद मेरी कहानी भी सुनाएगा कोई और

तब होगी ख़बर कितनी है रफ़्तार-ए-तग़य्युर
जब शाम ढले लौट के आएगा कोई और

उम्मीद-ए-सहर भी तो विरासत में है शामिल
शायद कि दिया अब के जलाएगा कोई और

कब बार-ए-तबस्सुम मिरे होंटों से उठेगा
ये बोझ भी लगता है उठाएगा कोई और

इस बार हूँ दुश्मन की रसाई से बहुत दूर
इस बार मगर ज़ख़्म लगाएगा कोई और

शामिल पस-ए-पर्दा भी हैं इस खेल में कुछ लोग
बोलेगा कोई होंट हिलाएगा कोई और