उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye kamal bhi to kam nahin tera

ये कमाल भी तो कम नहीं तिरा

یہ کمال بھی تو کم نہیں ترا

शायर: Ikram Mujeeb5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये कमाल भी तो कम नहीं तिरा
हर किसी ने कर लिया यक़ीं तिरा

इंतिज़ार कर रहे हैं देर से
इस उदास शहर के मकीं तिरा

इन दिनों पड़ाव किस जगह पे है
आज कल है कौन हम-नशीं तिरा

हर ज़बान पर सवाल है यही
एक मैं ही पूछता नहीं तिरा

ये नई उड़ान इस ज़मीन से
राब्ता न तोड़ दे कहीं तिरा