उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye humne mana ki hoga visal-e-yar nasib

ये हम ने माना कि होगा विसाल-ए-यार नसीब

یہ ہم نے مانا کہ ہوگا وصال یار نصیب

शायर: Yaqoob Ali Aasi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये हम ने माना कि होगा विसाल-ए-यार नसीब
दिल-ए-हज़ीं को मगर है कहाँ क़रार नसीब

ये अपना अपना मुक़द्दर है और क्या कहिए
ख़िज़ाँ नसीब कोई है कोई बहार नसीब

कोई तो एक नज़र के लिए तरसता है
किसी को होता है दीदार बार बार नसीब

न आरज़ू तिरी करते न आबरू खोते
ख़ुद अपने दिल पे अगर होता इख़्तियार नसीब

सुना तो है तेरा दीदार एक दिन होगा
इसी उमीद पे बैठे हैं इंतिज़ार नसीब

समझ सकेगा वो क्या मेरे दिल की बेताबी
हुआ न जिस को कभी सोज़-ए-इश्क़ यार नसीब

जहाँ में और भी 'आसी' अलम के मारे हैं
यहाँ पे तू ही नहीं एक सोगवार-नसीब